मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि इस्लाम में किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी धर्म में बनाए रखने की अनुमति नहीं है। उनके अनुसार, हर व्यक्ति अपनी आस्था और मर्जी से किसी भी धर्म को अपना सकता है और उसी में रह सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म को स्वीकार करता है, तो यह उसकी व्यक्तिगत पसंद है और इसमें किसी धर्म का हस्तक्षेप नहीं होता।
मौलाना साजिद कासमी ने यह भी कहा कि इस मामले में इस्लाम का कोई हस्तक्षेप या संबंध नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह व्यक्ति की निजी पसंद बताते हुए कहा कि किसी भी धर्म को अपनाना या छोड़ना व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र में आता है।
चांदनी कुरेशी से हुए निकाह से जुड़े प्रश्न पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जिस युवक ने कथित रूप से धर्म परिवर्तन के बाद विवाह किया था, अब जब वह वापस अपने मूल धर्म में लौट आया है, तो वह निकाह स्वतः ही समाप्त माना जाएगा। उनके अनुसार, इस स्थिति में पति-पत्नी का संबंध अब जारी नहीं रह सकता। अब उसने हिंदू धर्म अपना लिया है, तो अब उसका मजहबे इस्लाम की लड़की से ताल्लुक नहीं माना जाएगा।
बताया जा रहा है कि शामली के दवा व्यापारी देवराज मलिक के पुत्र आयुष मलिक का एक युवती और कुछ अन्य लोगों ने ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन करा दिया था। इस संबंध में पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि यह धर्मातंरण संपत्ति हड़पने के लिए किया गया था।
हालांकि अब इस मामले में नया मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में आयुष मलिक स्वयं यह कहते नजर आ रहा है कि उसने अपने परिवार के लिए दोबारा हिंदू धर्म अपनाया है। वीडियो में वह अपने घर के मंदिर में पूजा-अर्चना करते और अपने परिजनों से आशीर्वाद लेते हुए दिखाई दिया।
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