एकनाथ शिंदे के बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे में हुई गड़बड़ियों की जांच क्यों नहीं कराई गई, इस पर हुसैन दलवई ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने सही सवाल उठाया है, लेकिन उनसे भी जवाब मांगा जाना चाहिए।
हुसैन दलवई ने कहा, “जब एकनाथ शिंदे सरकार का हिस्सा थे, तब उन्होंने इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? एनडीए में शामिल होने के बाद उनके विचार बदल गए। अगर सिद्धिविनायक मंदिर में कोई अनियमितता हुई थी, तो उसकी जांच कराना उनकी सरकार की जिम्मेदारी थी। मंत्री रहते हुए उन्होंने कुछ नहीं किया, फिर अब यह मुद्दा क्यों उठा रहे हैं?”
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी हुसैन दलवई ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें योगी ने कहा था कि हनुमानगढ़ी में नमाज अदा करवाई गई थी, लेकिन क्या समाजवादी पार्टी, कांग्रेस या कोई अन्य सरकार जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करवा सकती है? इस पर हुसैन दलवई ने कहा, “मेरे ख्याल से जहां हिंदुओं की आस्था है, वहां नमाज पढ़ना बिल्कुल गलत था।”
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में अब तक चार नगरसेवकों की सदस्यता रद्द किए जाने के मुद्दे पर दलवई ने कहा कि सबसे पहले यह देखा जाना चाहिए कि ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई। उन्होंने कहा, “जब किसी से काम लिया जाता है, तो पहले उसकी पूरी जांच क्यों नहीं की जाती।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा और भारत-न्यूजीलैंड के बीच हुए व्यापक व्यापार समझौते को लेकर भी दलवई ने टिप्पणी की। करीब 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड का दौरा किया है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए इस व्यापार समझौते को दोनों देशों के लिए एक बड़ा कदम बताया।
इस पर तंज कसते हुए हुसैन दलवई ने कहा, “मुझे लगता है कि 2029 के बाद वे प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, इसलिए पूरी दुनिया की सैर कर रहे हैं।”



