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Wednesday, February 11, 2026
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मुर्शिदाबाद हिंसा: पश्चिम बंगाल पुलिस सवालों के कठघरे में, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार को घेरा!

ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर एक धब्बा हैं। उनकी राजनीति बंगाली हिंदुओं की भावना का अपमान है।

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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। रिपोर्ट में जहां राज्य पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, वहीं भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार को घेरा है।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने बुधवार को सोशल मीडिया पर रिपोर्ट का हवाला देते हुए ममता बनर्जी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर एक धब्बा हैं। उनकी राजनीति बंगाली हिंदुओं की भावना का अपमान है। पश्चिम बंगाल वोट बैंक और हिंसा का अखाड़ा नहीं, बल्कि बंगाली हिंदुओं की मातृभूमि है।”

जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 11 अप्रैल 2025 को धुलियान नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष मेहबूब आलम के नेतृत्व में बेटबोना गांव में हिंसा फैलाई गई, जिसमें 113 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। कई मंदिरों को भी निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपद्रवियों ने अपने चेहरे ढक रखे थे ताकि उनकी पहचान न हो सके।

सबसे गंभीर आरोप राज्य पुलिस पर लगे हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि जब यह हिंसा हो रही थी, पुलिस मूकदर्शक बनी रही और किसी भी तरह की तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय प्रशासन ने न तो पीड़ितों की मदद की और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया।

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में हिंसा को पूर्व-नियोजित और सुनियोजित बताया गया है। समिति का कहना है कि घटनाएं अपने आप नहीं हुईं, बल्कि इन्हें व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में हिंदू आबादी को कमजोर करना हो सकता है।

अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के उस बयान को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंसा के पीछे बाहरी तत्वों का हाथ है। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट राज्य सरकार के दावों की पोल खोलती है और स्पष्ट करती है कि हिंसा स्थानीय नेतृत्व की शह पर हुई।” उन्होंने आगे लिखा, “जब हिंदुओं के घर जलाए जा रहे थे, मंदिरों को नष्ट किया जा रहा था, तब ममता बनर्जी की पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी थी।”

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर तैयार की गई है और इसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य और न्यायिक सेवाओं से जुड़े अधिकारी शामिल थे। रिपोर्ट अब कोर्ट को सौंप दी गई है और मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करेगी।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आना तय माना जा रहा है। भाजपा ने ममता सरकार को घेरते हुए इस मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपने की मांग की है, वहीं टीएमसी की ओर से अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मुर्शिदाबाद हिंसा पर यह रिपोर्ट अब बंगाल की राजनीति में चुनावी माहौल के बीच एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। न्यायालय और राजनीतिक दलों की अगली प्रतिक्रिया पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।

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