भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने वर्ष 1998 बैच की वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी नीलम मीणा को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति राज्य के निवर्तमान सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल को पदोन्नत कर पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद की गई है।
हाल ही में संपन्न हुए 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद राज्य में हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग व नवनिर्वाचित भाजपा सरकार के बीच ‘मिलीभगत’ के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, निर्वाचन आयोग से विचार-विमर्श के बाद नीलम मीणा (IAS, WB:1998) को तत्काल प्रभाव से राज्य का नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया है। आयोग के कड़े निर्देशों के तहत, वे इस पद पर रहते हुए राज्य सरकार के अधीन कोई अन्य अतिरिक्त प्रभार नहीं संभालेंगी, सिवाय सचिवालय के चुनाव विभाग के प्रधान सचिव के।
नीलम मीणा पश्चिम बंगाल कैडर की एक बेहद अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी हैं। वे इससे पहले हुगली की जिला मजिस्ट्रेट (DM), सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण की सीईओ और उपभोक्ता मामलों के विभाग में प्रधान सचिव जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वे लीना चक्रवर्ती के बाद बंगाल की सीईओ बनने वाली दूसरी महिला आईएएस अधिकारी हैं।
इस प्रशासनिक बदलाव के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने पूर्व सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव मशीनरी ने पूरी तरह से निष्पक्षता को ताक पर रखकर भाजपा के पक्ष में काम किया था।
कल्याण बनर्जी का बयान, “हमने यह बात बार-बार कही है कि चुनाव आयोग ने निष्पक्ष रूप से काम नहीं किया, बल्कि उन्होंने भाजपा का साथ दिया। निवर्तमान सीईओ और भाजपा के बीच पूरी अंडरस्टैंडिंग (मिलीभगत) थी। काउंटिंग हॉलों (मतगणना केंद्रों) में उन्होंने पूरे चुनाव में धांधली की। हमारे उम्मीदवारों और एजेंटों के साथ मारपीट कर उन्हें बाहर फेंक दिया गया। केंद्रीय बलों ने लुटेरों की भूमिका निभाई और जमकर फर्जीवाड़ा किया गया।”
TMC नेताओं का कहना है कि चुनाव खत्म होते ही तत्कालीन सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल को राज्य का मुख्य सचिव पुरस्कार के रूप में दिया गया है, जो उनके आरोपों को सच साबित करता है।
कल्याण बनर्जी ने अपने हमलों को केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर को वहां के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का सचिव नियुक्त किए जाने पर भी आपत्ति जताई और इसे पूरी तरह गलत परंपरा करार दिया।
#WATCH | Hooghly, West Bengal: On Manoj Agarwal-led Bengal election machinery, TMC MP Kalyan Banerjee says, “…we have said this several times that the Election Commission did not act fairly, rather they favoured BJP…there was complete understanding between the CEO and BJP…in… pic.twitter.com/WqKKDyKX5i
— ANI (@ANI) May 24, 2026
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदल दिया है।
इन चुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक और निर्णायक जनादेश हासिल करते हुए 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीती हैं। पिछले चुनाव में मात्र 77 सीटों पर सिमटने वाली भाजपा ने इस बार प्रचंड बहुमत के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य में नई सरकार का गठन किया है।
इसी सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने 1990 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया, जिन्होंने दुष्यंत नारियाला की जगह ली है।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से ही प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर राजभवन, नई सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज है। नीलम मीणा की नए सीईओ के रूप में नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) और हालिया चुनावी निष्पक्षता को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच पहले से ही गहरा गतिरोध बना हुआ है।
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