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ईरान परमाणु समझौते से पहले चीन को सौंप सकता है संवर्धित यूरेनियम

परमाणु वार्ता के बीच तेहरान ने चीन से मांगी संभावित सुरक्षा गारंटी; ट्रंप ने फिर दोहराया — “ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा”

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ईरान और अमेरिका के बीच जारी परमाणु वार्ता के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी संभावित समझौते से पहले चीन को हस्तांतरित करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब वाशिंगटन लगातार तेहरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहा है।

अरब मीडिया आउटलेट अल अरेबिया की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस मुद्दे पर चीन के साथ बातचीत कर रहा है और अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते के दौरान बीजिंग से सुरक्षा गारंटी हासिल करने की कोशिश भी कर रहा है।

इस बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच कई मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अंतिम समझौता जल्द होने वाला है। उन्होंने कहा, “हम चर्चा के ज़्यादातर मुद्दे पर नतीजे पर पहुँच गए हैं। यह सही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि समझौता हस्ताक्षरित होने वाला है।”

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी एक बार फिर स्पष्ट किया कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया। पेजेशकियन ने कहा,“जब हमारे देश की इज्ज़त और संप्रभुता की बात होगी, तो हमारी वार्ता टीम कोई समझौता नहीं करेगी।”

दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर सख्त रुख दोहराया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दिया जाना चाहिए या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट किया जाना चाहिए।

ट्रंप ने कहा, “एनरिच्ड यूरेनियम (न्यूक्लियर डस्ट) या तो तुरंत US को दे दिया जाएगा ताकि उसे घर लाकर नष्ट कर दिया जाए, या बेहतर होगा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के साथ मिलकर और कोऑर्डिनेशन में, वहीं या किसी दूसरी सही जगह पर नष्ट कर दिया जाए, जहाँ एटॉमिक एनर्जी कमीशन, या उसके बराबर की संस्था, इस प्रोसेस और घटना की गवाह बने।”

मेमोरियल डे के अवसर पर दिए गए अपने संबोधन में ट्रंप ने दोहराया, “ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।”

इसी दौरान अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संघर्षविराम लागू होने के बावजूद अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी ठिकानों पर सीमित सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने CNN को बताया, “US सेना ने आज दक्षिणी ईरान में सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक की ताकि हमारे सैनिकों को ईरानी सेना से होने वाले खतरों से बचाया जा सके। टारगेट में मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइंस लगाने की कोशिश कर रही ईरानी बोट्स शामिल थीं। US सेंट्रल कमांड चल रहे सीज़फ़ायर के दौरान संयम बरतते हुए हमारी सेनाओं की रक्षा कर रही है।”

यदि ईरान वास्तव में अपने संवर्धित यूरेनियम को चीन की निगरानी या संरक्षण में भेजने का विकल्प अपनाता है, तो यह पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे चीन की भूमिका भी मध्य पूर्व के शक्ति संतुलन में और अधिक मजबूत हो सकती है।

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