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नेपाल: कौन है सुशीला कार्की जो बन सकती है अंतरिम प्रधानमंत्री !

भारत से है पुराना रिश्ता

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नेपाल में पिछले दिनों भड़के Gen Z प्रदर्शनों के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता अब भी बनी हुई है। केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम सरकार बनाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना सबसे अधिक है।

सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच मंथन

नेपाल आर्मी द्वारा लगाए गए राष्ट्रव्यापी प्रतिबंधों के बीच नए नेतृत्व को लेकर कई नाम सामने आए, जिनमें काठमांडू के मेयर बालेन शाह और पूर्व बिजली बोर्ड प्रमुख कुलमान घिसिंग भी शामिल थे। हालांकि, Gen Z प्रदर्शनकारियों की वर्चुअल बैठक में 5,000 से ज्यादा युवाओं ने कार्की के पक्ष में बहुमत दिया। उनके नेता रक्ष्या बम ने कहा कि “हमने सुशीला कार्की को नए प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया है। यह प्रस्ताव आज सेना प्रमुख से चर्चा के बाद औपचारिक किया जाएगा।”

बेखौफ जज के रूप में पहचान

2016 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं कार्की ने अपनी निडर न्यायाधीश के रूप में जानी जाती है।  कार्की प्रमाणिकता, निर्भीकता और स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध हैं। न्यायपालिका के शीर्ष पर पहुँचने से पहले, उनका एक लंबा कानूनी करियर रहा, 2009 में सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनीं और बाद में इतिहास रच दिया। जिसकी शुरुआत 1979 में विराटनगर में एक वकील के रूप में हुई थी।

अपने कार्यकाल के दौरान, कार्की ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए जिससे उनकी छवि एक सुधारवादी के रूप में मज़बूत हुई। 2012 में, उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों में जय प्रकाश गुप्ता को दोषी ठहराने का आदेश दिया, जिससे वे नेपाल में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने वाले पहले मंत्री बन गए। उन्होंने ऐसे कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए।  शांति मिशनों में भ्रष्टाचार से लेकर विवादास्पद निजगढ़ फास्ट ट्रैक परियोजना तक के संवेदनशील मामलों की अध्यक्षता की, साथ ही नेपाली महिलाओं को अपने बच्चों को नागरिकता देने की अनुमति देने जैसे प्रगतिशील निर्णय भी जारी किए।

BHU से पढ़ाई और भारतीय जुड़ाव

कार्की का भारत से भी गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने 1975 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की थी। इसके बाद 1978 में काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। हाल ही में नेपाल में आयोजित BHU एलुमनाई कार्यक्रम में उन्होंने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि BHU ने उन्हें न केवल शिक्षा दी बल्कि कला और राजनीति की समझ भी दी। उन्होंने बताया कि उन्हें BHU में अध्यापन और पीएचडी का अवसर मिला था, लेकिन किस्मत ने उन्हें न्यायपालिका की राह पर ला खड़ा किया।

2017 में कार्की के कुछ आदेशों ने कार्यपालिका को नाराज किया, खासकर पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को लेकर। इसके बाद संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। हालांकि, यह प्रस्ताव असफल रहा, लेकिन इसने उन्हें “निडर और स्वतंत्र न्यायाधीश” की छवि दी।

पूर्व राजा का बयान और मौजूदा हालात

इस बीच नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र बिक्रम शाह ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यवस्था या विचारधारा नागरिक स्वतंत्रता से बड़ी नहीं होती।” संसद भंग होने के बाद पूर्व राजा का बयान आया है, जिससे अंतरिम सरकार बनने और यहां तक कि राजशाही की वापसी की अटकलें तेज हैं।

इधर, आंध्र प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे सभी तेलुगु नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले ही सलाह जारी कर दी थी कि हालात सामान्य होने तक भारतीय नागरिक नेपाल की यात्रा न करें।

नेपाल के इतिहास में पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना न केवल एक बड़ा राजनीतिक बदलाव होगा, बल्कि भ्रष्टाचार और व्यवस्था परिवर्तन के लिए सड़कों पर उतरे युवाओं की जीत के रूप में भी देखा जाएगा।

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