सीसीईए के अनुसार, यह बाईपास पटियाला, दिल्ली, मोहाली एरोसिटी और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले मार्गों से यातायात को डायवर्ट करेगा, जिससे जीरकपुर और पंचकूला में होने वाली भारी ट्रैफिक जाम की समस्या को हल किया जा सकेगा। इसके साथ ही, इस मार्ग से यात्रा का समय भी कम होगा और यातायात का संचालन सुगम होगा।
सरकार के अनुसार, इस परियोजना से न केवल जीरकपुर और पंचकुला को जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के क्षेत्र में भी यातायात के कुशल नेटवर्क के निर्माण में सहायक होगी। इसके अंतर्गत एक रिंग रोड का विकास भी किया जा रहा है, जिसमें जीरकपुर बाईपास एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।
यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत परिवहन अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने का हिस्सा है। इसके तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जैसा कि हाइब्रिड एनीयूटि मोड (एचएएम) के तहत किया गया है। इस मॉडल में सरकार 40 प्रतिशत परियोजना लागत का भुगतान निजी क्षेत्र को एनीयूटि के रूप में करती है, जबकि शेष 60 प्रतिशत राशि निजी क्षेत्र से जुटाई जाती है।
इससे पहले, पिछले महीने सरकार ने बिहार में पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर के निर्माण को भी मंजूरी दी थी, जिसका कुल खर्च 3,712.40 करोड़ रुपये अनुमानित है।
नई दिल्ली: मोदी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण तीन परियोजनाओं को दी मंजूरी!



