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Tuesday, May 26, 2026
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केजरीवाल की चिट्ठी पर बढ़ी सियासत, सचदेवा बोले सजा से डर!

वीरेंद्र सचदेवा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "अरविंद केजरीवाल ने जो पत्र लिखा है उसकी हम निंदा करते हैं। जिस तरह से उन्होंने न्यायाधीश को पत्र लिखा है| 

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की जस्टिस स्वर्णमाला के खिलाफ टिप्पणी पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सजा के डर से केजरीवाल राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैं, लेकिन भारतीय लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता है।

वीरेंद्र सचदेवा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “अरविंद केजरीवाल ने जो पत्र लिखा है उसकी हम निंदा करते हैं। जिस तरह से उन्होंने न्यायाधीश को पत्र लिखा है, न्यायालय पर टिप्पणी की है, यह दुखद है। राजनीति में इस तरह के आचरण की जगह नहीं होती है।

अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में आरोपी हैं। उच्च न्यायालय ने उनकी अपील को अस्वीकार कर दिया था। लेकिन आपको न्यायालय के सामने जाना है। उससे बचने के लिए आप जिस तरह की राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैं, ऐसा भारतीय लोकतंत्र में नहीं होता।”

उन्होंने आगे कहा, “अरविंद केजरीवाल इस बात को इच्छी तरह से जानते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद ग्रहण करते हुए तीन बार संविधान की शपथ ली थी। आज केजरीवाल का आचरण संविधान की मर्यादाओं का हनन कर रहा है। केजरीवाल इस बात को भी समझते हैं कि शराब घोटाले में उन्हें सजा मिलनी तय है। उस सजा के डर से वे इस तरह का आचरण कर रहे हैं।”

महात्मा गांधी का नाम लिए जाने पर वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “अरविंद केजरीवाल महात्मा गांधी का नाम ले रहे हैं। मैं उनसे एक सवाल पूछता हूं कि क्या महात्मा गांधी ने कहा था, ‘शराब की तस्करी करो? शराब की दुकानों के नाम पर कमीशन खाओ?'”

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष ने कहा, “महात्मा गांधी ने जिन परंपराओं का पालन किया, केजरीवाल उसका बिल्कुल उल्टा कर रहे हैं। ये महात्मा गांधी के नाम को बदनाम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “गांधी की समाधि पर बैठकर आम आदमी पार्टी के नेता नौटंकी करते हैं। हर गांधी भक्त को केजरीवाल को इसका जवाब देना चाहिए। केजरीवाल को अपने आचरण और व्यवहार पर भी शर्म आनी चाहिए। हमें अपने लोकतंत्र और आचरण पर भरोसा होना चाहिए। अगर आपको लगता है कि निर्णय आपके पक्ष में नहीं आएगा तो आप ऊपरी अदालत में जाकर अपील करें। लेकिन पहले से ही तय कर लेना कि यह न्यायाधीश इस तरह का फैसला देंगे, ये गलत है।”

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