रायबरेली में शुक्रवार (12 सितंबर) को हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच गरमागरमी देखने को मिली। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई थी, जहाँ राहुल गांधी बतौर समिति अध्यक्ष चर्चा अपने परामर्श से चलाने पर जोर दे रहे थे। इस पर दिनेश प्रताप सिंह ने पलटवार किया और कहा कि चूँकि गांधी संसद में स्पीकर के निर्देशों का पालन नहीं करते, इसलिए वे भी गांधी की बात मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
मोदी की माँ पर विवादित टिप्पणी को लेकर प्रदर्शन
इससे पहले जब राहुल गांधी रायबरेली पहुँचे, तो दिनेश प्रताप सिंह और उनके समर्थकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ के खिलाफ बिहार में हुई कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। सिंह ने कहा था, “राहुल गांधी इस मुद्दे पर चुप रहे। उन्हें माफी माँगनी चाहिए और ऐसे आपत्तिजनक बयान देने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकालना चाहिए।”
हालाँकि बैठक के दौरान बढ़ते तनाव को थोड़ी देर के लिए चाय सर्विस ने हल्का कर दिया। मंत्री सिंह ने DISHA गाइडलाइंस का मज़ाक उड़ाते हुए चाय पर टिप्पणी की, तो राहुल गांधी ने उन्हें अतिरिक्त चाय और बिस्कुट ऑफर किए। यह दृश्य उपस्थित लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
– राहुल गांधी एक दिन पहले रायबरेली आए थे
– यहां उनके राज्य मंत्री दिनेश सिंह के बीच बहस हो गई
– दिनेश सिंह एक जमाने में गांधी परिवार के खास होते थे
——-#RahulGandhi pic.twitter.com/epHt5Fjhrm— Vaibhava Pandey (@VaibhavaPandey) September 12, 2025
बैठक में अनुपस्थिति और आरोप
बैठक में अमेठी सांसद केएल शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन ऊँचाहार विधायक मनोज कुमार पांडे अनुपस्थित रहे। बाद में मीडिया से बातचीत में दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि राहुल गांधी बैठक को DISHA गाइडलाइंस से हटकर चलाना चाहते थे, जिसका उन्होंने विरोध किया। सिंह ने आरोप लगाया कि गांधी अपने साथ टीम और तीन पन्नों का ड्राफ्ट लेकर आते हैं और उसी हिसाब से बैठक को मोड़ने की कोशिश करते हैं।
गौरतलब है कि दिनेश प्रताप सिंह पहले कांग्रेस में थे और 2018 में भाजपा से जुड़ गए। उन्होंने रायबरेली से गांधी परिवार के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। राहुल गांधी और सिंह के बीच यह तीखी नोकझोंक न केवल स्थानीय राजनीति को गरमा रही है बल्कि सोशल मीडिया पर भी बहस का विषय बनी हुई है।
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