दरअसल, प्रियांक खड़गे ने आरएसएस चीफ मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के सोर्स, आय-व्यय और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे थे।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने आईएएनएस से कहा, “हमने उनसे पूछा है कि संविधान के किस प्रावधान में यह लिखा है कि किसी संगठन को काम करने के लिए रजिस्टर होना जरूरी है। ऐसी कोई कानूनी जरूरत नहीं है।”
आलोक कुमार ने कहा, “प्रियांक खड़गे से पूछा गया कि किस कानून के तहत ऐसे संगठनों का रजिस्ट्रेशन जरूरी है, लेकिन वे जवाब नहीं दे पाए। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(सी) हर भारतीय को अपनी मर्जी से संगठन और संस्थाएं बनाने का अधिकार देता है। यह अधिकार खुद संविधान ने दिया है।”
आलोक कुमार ने कहा कि यह अधिकार हमको संविधान के तहत मिलता है। साल 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगा था। इसके बाद सरकार ने संघ से संविधान देने के लिए कहा और आरएसएस ने ऐसा ही किया। इसके बाद सरकार ने प्रतिबंध हटाया। हम अपने संविधान के तहत चलते हैं।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरु जी’ के देहांत पर लोकसभा में श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने श्रीगुरु जी को अपने विचारों पद दृढ़ रहने वाला एक अद्भुत व्यक्तित्व बताया था।
उन्होंने कहा कि प्रियांक को यह भी जानकारी लेनी चाहिए कि संविधान के अंतर्गत संघ अपने सदस्यों से बाहर के किसी व्यक्ति से काम का पैसा नहीं लेता है। गुरु दक्षिणा होती है और वह भी केवल स्वयंसेवक कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मैं कहूंगा कि प्रियांक खड़गे को या तो ज्ञान नहीं है या वह तथ्यों को जानते समझते हुए दुर्भावना से इस प्रकार का दुष्प्रचार कर रहे हैं।
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