बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (SP) ने भी अप्रत्याशित कदम उठाते हुए बिहार की चुनावी जंग में अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई है। दिलचस्प यह है कि समाजवादी पार्टी का बिहार में कोई भी उम्मीदवार नहीं है, फिर भी पार्टी ने महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-वामदलों) के समर्थन में प्रचार के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है।
पार्टी के इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश यादव और लालू यादव के बीच मजबूत रिश्तों का नतीजा बता रहे हैं। समाजवादी पार्टी की सूची में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, उनकी पत्नी डिंपल यादव, वरिष्ठ नेता आजम खान, राजीव राय, तेज प्रताप सिंह यादव, इकरा हसन, प्रिया सरोज सहित 13 सांसदों को शामिल किया गया है।
जानकारों के मुताबिक, सपा नेताओं का बिहार आना न केवल महागठबंधन को मजबूती देगा, बल्कि यादव और पिछड़ा वर्ग के वोटों को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा भी है। तेज प्रताप सिंह यादव और डिंपल यादव एक साथ मंच साझा करते हुए राजद प्रत्याशियों के लिए वोट मांगेंगे, जिससे चुनाव प्रचार को अतिरिक्त ताकत मिलेगी।
इतिहास पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी का बिहार में सबसे अच्छा प्रदर्शन फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में हुआ था, जब पार्टी ने चार सीटें जीती थीं। हालांकि, उस विधानसभा को एक महीने बाद ही भंग कर दिया गया था।
इस बार सपा का बिना उम्मीदवार के मैदान में उतरना विपक्षी एकता यानी INDIA गठबंधन के समर्थन में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। पार्टी का उद्देश्य भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट करना और महागठबंधन को यादव बहुल इलाकों में और मजबूत करना है।
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