29 C
Mumbai
Wednesday, March 11, 2026
होमदेश दुनियाएसबीआई ने बताया 'पीएमएमवाई' महिलाओं को बना रही सशक्त!

एसबीआई ने बताया ‘पीएमएमवाई’ महिलाओं को बना रही सशक्त!

लेटेस्ट सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएमएमवाई के तहत, योजना की शुरुआत से लेकर 28 फरवरी, 2025 तक 33.19 लाख करोड़ रुपये के 52.07 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए हैं।

Google News Follow

Related

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) में महिलाओं की भागीदारी 52 करोड़ खाताधारकों में से 68 प्रतिशत है। महिलाओं की इस बढ़ती भागीदारी ने पिछले 10 वर्षों में महिला उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाया है। यह जानकारी बुधवार को एक रिपोर्ट में दी गई।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के इकोनॉमिक रिसर्च डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले नौ वित्त वर्षों वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2025 में, प्रति महिला पीएमएमवाई वितरण राशि 13 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 62,679 रुपये हो गई, प्रति महिला वृद्धिशील जमा राशि 14 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 95,269 रुपये हो गई, जो दर्शाता है कि पीएमएमवाई जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण के लिए एक प्रभावी साधन बन गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्यमशीलता से वंचित सामाजिक समूहों को जोड़ने में पीएमएमवाई का प्रभाव काबिले-तारीफ रहा है। 52 करोड़ पीएमएमवाई खातों में से लगभग आधे एससी/एसटी और ओबीसी सामाजिक वर्गों के हैं। वहीं, एक कदम आगे बढ़ते हुए, कुल खाताधारकों में से 68 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं जबकि 11 प्रतिशत अल्पसंख्यक समूहों से हैं।

एसबीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार में पीएमएमवाई महिला उद्यमियों की संख्या 4.2 करोड़ है, जो कि सबसे अधिक है। इसके बाद 4.0 करोड़ महिला उद्यमियों के साथ तमिलनाडु, 3.7 करोड़ महिला उद्यमियों के साथ पश्चिम बंगाल का स्थान आता है।

महाराष्ट्र में कुल महिला खाताधारकों की 79 प्रतिशत सबसे बड़ी हिस्सेदारी है, उसके बाद झारखंड में 75 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 73 प्रतिशत है।” लोन का औसत टिकट साइज लगभग तीन गुना हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2016 में 38,000 रुपये से वित्त वर्ष 2023 में 72,000 रुपये और वित्त वर्ष 2025 में 1.02 लाख रुपये हो गया।

लेटेस्ट सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएमएमवाई के तहत, योजना की शुरुआत से लेकर 28 फरवरी, 2025 तक 33.19 लाख करोड़ रुपये के 52.07 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए हैं। माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंसिंग एजेंसी (एमयूडीआरए) के तहत पीएमएमवाई की स्थापना माइक्रो यूनिट्स से संबंधित विकास और पुनर्वित्त गतिविधियों के लिए की गई थी।

पीएमएमवाई यह सुनिश्चित करता है कि सदस्य ऋण देने वाली संस्थाओं (एमएलआई) – अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) द्वारा 20 लाख रुपये तक का कोलेटरल फ्री संस्थागत ऋण प्रदान किया जाए।

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शिशु की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016 में 93 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 51.7 प्रतिशत हो गई है, जबकि किशोर खाते की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016 में 5.9 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 44.7 प्रतिशत हो गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “इससे साफ पता चलता है कि कुछ शिशु खातों में वृद्धि हुई है और किशोर ऋण की उच्च सीमा का लाभ उठाया गया है। साथ ही एमएसएमई इकाइयां बड़ी हो रही हैं।”

यह भी पढ़ें-

नई दिल्ली: संसदीय कार्य मंत्री का बड़ा बयान, राष्ट्रहित में है वक्फ बिल!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,022फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
297,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें