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छत्तीसगढ़ में सुरक्षा कैंप बनेंगे जनसेवा केंद्र, आदिवासियों को आरक्षण मिलेगा!

अमित शाह ने कहा कि आज का दिन सचमुच एक ऐतिहासिक दिन है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि महज छह महीनों के भीतर, यह केंद्र जो अभी केवल एक सरकारी पहल जैसा दिखता है| 

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ जन सुविधा केंद्र के शुभारंभ के मौके पर कहा कि हमारे सुरक्षा बलों ने नक्सलमुक्त भारत बनाने के लिए छत्तीसगढ़ में जहां-जहां सुरक्षा कैंप बनाकर सिक्योरिटी वैक्यूम समाप्त किए थे, अब वहां कॉमन सर्विस सेंटर बनाए जा रहे हैं।

अमित शाह ने कहा कि आज का दिन सचमुच एक ऐतिहासिक दिन है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि महज छह महीनों के भीतर, यह केंद्र जो अभी केवल एक सरकारी पहल जैसा दिखता है, स्थानीय आदिवासियों की मौजूदगी और उनकी हंसी-खुशी से गुलजार, जीवन से भरपूर नजर आएगा। जिस जमीन पर मैं आज खड़ा हूं, वह अपने आप में भारत के हर नागरिक के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल है।

यह शहीद वीर गुंडा धुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि है। आज, उनसे प्रेरणा लेते हुए नेतानार कैंप (जो 2013 से एक सुरक्षा चौकी के रूप में काम कर रहा था) अब आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए समर्पित एक सेवा केंद्र में बदला जा रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि आजादी देशभर में बहुत पहले ही आ गई थी, लेकिन हमारे बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद ही आजादी का सूर्य उदय हुआ है। इस दौरान बस्तर का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हम बहुत जल्द करेंगे। यहां के लोगों के विकास के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी।

सरकार ने आदिवासी भाई-बहनों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की है। कहीं पर भी नौकरी का विज्ञापन निकलता है, तो 15 फीसदी आरक्षण आपके लिए सुनिश्चित है। एक बार आप अपने बच्चों को पढ़ा दें, तो उन्हें सरकारी नौकरी भी मिलेगी और उद्योगों में भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

आपके लिए बनाई गई एक राष्ट्रीय स्तर की कोऑपरेटिव के माध्यम से वन उपज का भी अच्छे तरीके से पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने का हमने संकल्प लिया है। डेयरी और वन उपज, ये दोनों मिलकर यहां रोजगार के क्षेत्र में एक नया युग शुरू करेंगे।

उन्होंने कहा कि हमने डेयरी का मॉडल भी नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से लागू करने का निर्णय लिया है। हर गांव में डेयरी पहुंचेगी और हर आदिवासी बहन को दो पशु देने का काम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगे।

इन कैंपों को बेहतर ढंग से डिजाइन करने के लिए हम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन को यह प्रोजेक्ट देने वाले हैं। हर कैंप का डिजाइन संपूर्ण होगा, जिसके अंदर बैंकिंग की सुविधा भी होगी। आपका आधार कार्ड भी बनेगा, राशन कार्ड भी बनेगा और सरकार की योजनाओं के पैसे भी आपको यहीं से मिल जाएंगे। कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से राज्य सरकार और केंद्र सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही भवन से आपको मिलेगा।

बस्तर में अभी तक लगभग 196 कैंप हैं। इनमें से 70 कैंपों को हम इसी प्रकार के सेवा केंद्रों में डेढ़ साल के भीतर परिवर्तित करके आदिवासी कल्याण के केंद्र बनाने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की सुविधाओं पर जनजातीय बहनों-भाइयों का भी उतना ही अधिकार है, जितना दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद के लोगों का है। यह आपकी सरकार है, और आपके जीवन में खुशियां लाना इस सरकार का उत्तरदायित्व है।

इसी उद्देश्य से इस कैंप की शुरुआत की गई है। नक्सलियों ने सालों तक यह गलतफहमी फैलाई कि हमारा विकास नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने हथियार उठाए, लेकिन इस क्षेत्र का विकास इसलिए नहीं हुआ क्योंकि वे हथियार लेकर बैठे थे। अब उन्होंने सरेंडर किया है और विकास की शुरुआत हो चुकी है।

अमित शाह ने कहा कि हमने यहां पूर्ण शिक्षा का कार्यक्रम चलाया है। संघ के स्वयंसेवक यहां लोगों को लिखना-पढ़ना सिखा रहे हैं। जब नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया गया, तो उसका उद्देश्य नक्सलवाद को समाप्त करने के साथ ही गरीब आदिवासियों के जीवन में वे सभी सुविधाएं पहुंचाना था, जो बड़े-बड़े शहरों में उपलब्ध हैं, ताकि आपके बच्चों को भी वे सभी अवसर मिल सकें।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अनेक आदिवासी भाई-बहन, जिनका कोई दोष नहीं था, नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईडी विस्फोटों का शिकार हो जाते थे। बच्चों को स्कूलों से उठाकर नक्सली कैंपों में ले जाया जाता था। ‘जनता की सरकार’ के नाम पर कई निर्दोष लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी जाती थी।

देश आजाद हुआ, लेकिन आजादी को यहां तक पहुंचने नहीं दिया गया। एक समय ऐसा था, जब यहां 6 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। स्कूल और अस्पताल उजाड़ दिए गए थे। राशन और रोजगार लोगों तक पहुंचने नहीं दिया जाता था और बैंक की तो कल्पना भी दूर थी। आज उसी स्थान पर गरीब आदिवासी भाई-बहनों के लिए जनसेवा केंद्र बनाया जा रहा है।

यह भूमि भारत के हर नागरिक के लिए तीर्थ समान है। यह शहीद वीर गुंडाधुर जी की जन्मभूमि है। वीर आदिवासी नेता गुंडाधुर जी ने विदेशी शासन के खिलाफ बस्तर के आदिवासियों को एकजुट किया था। उनसे प्रेरणा लेकर यह सुरक्षा केंद्र, जो पहले लोगों की सुरक्षा करता था, अब सेवा केंद्र बनकर जनसेवा करेगा।​ 

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