जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने एनडीए सरकार के सुशासन मॉडल का बचाव करते हुए कहा कि 2005 में जब नीतीश कुमार एनडीए के मुख्यमंत्री बने थे, तब सामाजिक तत्वों से जुड़े दो लाख से ज्यादा मामले लंबित थे।
केसी त्यागी ने कहा कि जब नीतीश कुमार को बिहार की जिम्मेदारी मिली तब, अपराधी खुलेआम घूम रहे थे। हमने विशेष अदालतें बनाईं और 55,000 लोगों को दोषसिद्धि के बाद जेल भेजा। यह हमारे सुशासन का नतीजा था।
केसी त्यागी का बयान उस वक्त आया है, जब हाल में एनडीए ने बिहार चुनाव को लेकर संकल्प पत्र जारी किया। दूसरी ओर मोकामा में हत्याकांड को लेकर विपक्षी दल नीतीश सरकार से सवाल पूछ रही है।
आईएएनएस से बातचीत के दौरान जदयू नेता ने राजद सांसद मनोझ झा के उस पत्र पर पलटवार किया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आचार संहिता के बावजूद महिलाओं के बैंक खाते में 10 हजार रुपए भेजे जा रहे हैं। इस पर केसी त्यागी ने कहा कि बिहार सरकार एक संवेदनशील और कानून का सम्मान करने वाली सरकार है। मनोज झा का बयान राजनीति से प्रेरित है।
उन्होंने मोकामा हत्याकांड पर विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि बिहार की एनडीए सरकार कानून का राज स्थापित करती रही है, जिसमें अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। अपराधी चाहे कोई भी हो, कानून अपना काम करेगा।
भाजपा सांसद द्वारा दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने के प्रस्ताव पर केसी त्यागी ने कहा कि ऐसे फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएं तो अच्छी बात होगी। इंद्रप्रस्थ नाम बुरा नहीं है।
बताते चलें कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को एनडीए ने संकल्प पत्र जारी किया था। एनडीए में शामिल राजनीतिक दलों ने दावा किया है कि एनडीए का संकल्प पत्र पीएम मोदी के बिहार से गहरे लगाव और विकास के संकल्प का प्रतीक है।
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