कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी आतंकवाद पर टिप्पणी को लेकर हो रही आलोचनाओं पर तेज पलटवार करते हुए कहा है कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और कुछ ‘अति उत्साही’ लोग इसे निहित स्वार्थों के तहत गलत तरीके से प्रचारित कर रहे हैं। थरूर ने कांग्रेस के ही कुछ नेताओं की नाराजगी के जवाब में यह बयान एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया।
हाल ही में पनामा में आयोजित वैश्विक प्रतिनिधिमंडल के दौरान थरूर ने भारत की आतंकवाद पर नीति की सराहना करते हुए कहा था कि “अब आतंकवादी समझते हैं कि उन्हें अपने कृत्यों की सज़ा मिलेगी।” थरूर की इस टिप्पणी को मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ की प्रशंसा के रूप में देखा गया, जिससे कांग्रेस के अंदर ही विवाद पैदा हो गया।
कांग्रेस नेता उदित राज ने थरूर पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्हें भाजपा का ‘सुपर प्रवक्ता’ घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने थरूर पर आरोप लगाया कि वे यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार से पहले भारत ने कभी आतंक के खिलाफ सीमापार कार्रवाई नहीं की, जो कि कांग्रेस के ‘स्वर्णिम इतिहास’ का अपमान है।
उदित राज ने कहा, “1965 में भारतीय सेना ने लाहौर सेक्टर में घुसकर पाकिस्तान को चौंकाया था, 1971 में पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांटा और यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी कई सर्जिकल स्ट्राइक हुईं जिनका राजनीतिकरण नहीं किया गया।”
थरूर ने एक्स पर बिना किसी का नाम लिए जवाब देते हुए लिखा, “एलओसी पार भारतीय वीरता की मेरी कथित अज्ञानता को लेकर गुस्से में बौखलाए अति उत्साही लोगों के लिए – मैं साफ करना चाहता हूं कि मेरी टिप्पणी सिर्फ हाल के आतंकवादी हमलों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर थी, न कि पूर्व युद्धों पर।”
उन्होंने आगे कहा, “आलोचक और ट्रोल्स अपने विकृत विचार साझा करने को स्वतंत्र हैं, क्योंकि शायद उनके पास और कोई बेहतर काम नहीं है।” थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों में हाल के वर्षों में आतंकवादी हमलों पर की गई सीमित और नियंत्रित जवाबी कार्रवाइयों का संदर्भ था।
उदित राज के अलावा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी थरूर की आलोचना का समर्थन किया। खेड़ा ने उदित राज के पोस्ट को रीपोस्ट कर अपनी सहमति जताई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पार्टी के अंदर थरूर की टिप्पणी को लेकर असहमति गहराती जा रही है।
पनामा में आतंकवाद पर भारत की नीति की सराहना करने वाले शशि थरूर की टिप्पणी अब कांग्रेस के भीतर ही विवाद का केंद्र बन गई है। जहां थरूर इसे निहित स्वार्थों द्वारा तोड़-मरोड़ कर पेश करने की साजिश बता रहे हैं, वहीं पार्टी के कुछ नेता इसे कांग्रेस की सैन्य उपलब्धियों के अपमान के रूप में देख रहे हैं।
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