केरल में शशि थरूर के काफिले पर हमला, सुरक्षाकर्मी से मारपीट

पुलिस ने दो को लिया हिरासत में

केरल में शशि थरूर के काफिले पर हमला, सुरक्षाकर्मी से मारपीट

Shashi Tharoor's convoy attacked in Kerala, security personnel assaulted

केरल के मलप्पुरम जिले में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के काफिले पर हमला हुआ है। उनके काफिले रोकने के साथ ही उनके सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट की गई। घटना शुक्रवार(3 अप्रैल) की है, जब थरूर चुनाव प्रचार के लिए वंडूर जा रहे थे।

जानकारी के अनुसार, थरूर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के उम्मीदवार एपी अनिलकुमार के समर्थन में प्रचार करने जा रहे थे। इसी दौरान करीब आठ लोगों के एक समूह ने उनके काफिले को बीच रास्ते में रोक लिया और आगे बढ़ने नहीं दिया। जब उनके सुरक्षा दल का एक सदस्य हस्तक्षेप करने के लिए वाहन से उतरा, तो उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।

स्थानीय पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में घटना के पीछे कोई स्पष्ट राजनीतिक कारण सामने नहीं आया है।

घटना के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए समर्थकों और शुभचिंतकों का आभार जताया। उन्होंने लिखा, “वह ठीक हैं और मुझे कोई नुकसान नहीं हुआ। सभी दोस्तों और शुभचिंतकों का धन्यवाद। हमने कल बिना डरे काम किया और प्लान के मुताबिक दो और इवेंट पूरे किए।” यानी वे सुरक्षित हैं और कार्यक्रम निर्धारित अनुसार जारी रहे।

घटना के बावजूद थरूर ने अपना चुनावी कार्यक्रम जारी रखा और वंडूर में जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) आगामी विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल करेगा।

केरल में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। मुख्यमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर थरूर ने कहा कि इसका निर्णय कांग्रेस हाईकमान निर्वाचित विधायकों की राय के आधार पर करेगा।

अपने संबोधन में उन्होंने राज्य में रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। थरूर ने कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिलने के कारण वे राज्य छोड़कर अन्य जगहों पर जा रहे हैं, जिसे रोकना जरूरी है।

इसके अलावा, थरूर ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की आलोचना करते हुए इसे भयावह बताया और कहा कि सरकार को चर्च द्वारा संचालित स्कूलों, अस्पतालों और अनाथालयों को अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए स्थायी समिति के पास भेजने की मांग भी की।

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