भारत में निर्वासित जीवन जी रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पहले सार्वजनिक भाषण के जरिए मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला है। 12 फरवरी को होने वाले बांग्लादेश के आम चुनाव से पहले शेख हसीना ने देश की जनता से मौजूदा सरकार के खिलाफ खड़े होने का आह्वान करते हुए कहा कि यूनुस सरकार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में सक्षम नहीं है। अवामी लीग प्रमुख ने अपने भाषण में बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए महिलाओं, लड़कियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचारों के गंभीर आरोप लगाए।
शेख हसीना का यह संदेश एक ऑडियो भाषण के रूप में सामने आया, जिसे पहले फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब में आयोजित ‘सेव डेमोक्रेसी इन बांग्लादेश’ कार्यक्रम में सुनाया गया। इसके बाद बांग्लादेश अवामी लीग के एक्स हैंडल पर भी इसे जारी किया गया। यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन है, जब से उन्हें 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटाए जाने के बाद भारत में शरण लेनी पड़ी थी।
अपने भाषण में शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस को ‘भ्रष्ट, सत्ता का भूखा गद्दार’ बताते हुए आरोप लगाया कि वह उन्हें सत्ता से बेदखल करने की साजिश में शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस मुश्किल घड़ी में, पूरे देश को एकजुट होकर और महान मुक्ति संग्राम की हमारी भावना से प्रेरित होकर आगे बढ़ना चाहिए।”
हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर कहा, “(बांग्लादेश में) लोकतंत्र अब निर्वासन में है। मानवाधिकारों को धूल में मिला दिया गया है। प्रेस की स्वतंत्रता खत्म की जा चुकी है। हिंसा, यातना और महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन हमले रुक नहीं रहे हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार उत्पीड़नों का सामना करना पड़ रहा है। कानून और व्यवस्था नाम की चीज नहीं रह गई है।”
Awami League President Sheikh Hasina's message on the sham election which is being staged by the #YunusRegime in the name of #democracy. pic.twitter.com/UrpjpC6VG6
— Bangladesh Awami League (@albd1971) January 24, 2026
पूर्व प्रधानमंत्री ने बांग्ला में दिए अपने भाषण में हाल के घटनाक्रमों की ‘अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के हाथों निष्पक्ष जांच’ की मांग भी की। उन्होंने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार को ‘विदेशी कठपुतली’ करार देते हुए इसे अपने ‘राष्ट्र का दुश्मन’ बताया। शेख हसीना ने बांग्लादेश की जनता से आह्वान किया कि वह उस संविधान की रक्षा के लिए आगे आए, जिसे उनके शब्दों में ‘शहीदों ने अपने खून से लिखा’ और जिसने बांग्लादेश को आज़ादी दिलाई।
गौरतलब है कि यूनुस सरकार के कार्यकाल में अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोके जाने को लेकर भी शेख हसीना और उनकी पार्टी लगातार सवाल उठाती रही है। चुनाव से ठीक पहले आया यह भाषण बांग्लादेश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब देश में कानून-व्यवस्था, मानवाधिकार और चुनावी निष्पक्षता को लेकर पहले से ही तीखी बहस जारी है।
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