दिग्विजय सिंह ने कहा कि सोनम वांगचुक की केवल एक मांग थी कि छठी अनुसूची लागू करने के लिए जो वादा चुनाव में किया गया था उसे पूरा किया जाए। वे उसकी मांग कर रहे थे। बिना किसी कारण के सोनम वांगचुक सौ दिन से गिरफ्तार हैं।
दिग्विजय ने प्रश्न करते हुए कहा कि क्या ऐसी स्थिति में सबके साथ न्याय हो रहा है। सबके विकास के बारे में इतना कहना चाहता हूं कि आर्थिक असमानता बढ़ रही है। आज की असमानता का ब्रिटिश शासन के समय से भी बदतर हो चुकी है।
उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में लगभग 10 प्रतिशत व्यक्ति लगभग 58 प्रतिशत राष्ट्रीय आय प्राप्त करते हैं, जबकि निचले 50 प्रतिशत व्यक्तियों को केवल 15 प्रतिशत मिल पाता है। जहां 10 प्रतिशत व्यक्तियों के पास 65 प्रतिशत संपत्ति है, वहीं 50 प्रतिशत के पास 6.4 प्रतिशत संपत्ति है।
दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में कहा कि हमारे कॉर्पोरेट जो टैक्स देते हैं उससे ज्यादा आम आदमी आज टैक्स भर रहा है। ये सरकार गरीब विरोधी है, मजदूर विरोधी व किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि जहां आज संवैधानिक अधिकारों को कम किया जा रहा है, वहीं कर्तव्यों को अधिक महत्व देने का प्रयास किया जा रहा है। कर्तव्यों के प्रति हम सजग हैं, लेकिन हमारे अधिकारों को इसमें कम नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हम लोग कहां पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की लगभग 2 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा किया हुआ है। उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर चीन ने कब्जा कर लिया है।
दिग्विजय ने कहा कि आज लोकतंत्र खतरे में है और उसका कारण यह है कि देश में आजादी और बंटवारे के बाद जो सौहार्दपूर्ण वातावरण पैदा किया गया था वह धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। कट्टरपंथी ताकतें धार्मिक उन्माद फैलाकर एक तरफ हिंदुओं को और दूसरी तरफ मुसलमानों को भड़का रही हैं। जो सौहार्दपूर्ण वातावरण बना हुआ था, उसमें अब हम लोगों को संकट नजर आ रहा है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्दपूर्ण वातावरण में भेदभाव और आर्थिक असमानता पर केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सदन में कहा कि मजदूरों की हालत ठीक नहीं है। आज देश में अव्यवस्था की स्थिति है।
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