सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा, “राजभर के बयान भारतीय जनता पार्टी सरकार के सूचना विभाग के अधिकारी लिखते हैं और वे जो चाहते हैं, उनसे वही कहलवाते हैं। आप उनके बयानों की सच्चाई का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वे जोर-शोर से कहते रहे कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे, फिर भी वे चुनाव नहीं करवा पाए, जबकि उसी विभाग के मंत्री हैं। जिस मंत्री को अपने ही विभाग के बारे में सही जानकारी नहीं है, हमें दूसरे मामलों में उनसे जानकारी लेने की कोई जरूरत नहीं है।”
उदयवीर सिंह ने कहा, “हर कोई उनसे (ओपी राजभर) पूछ रहा है, आरक्षण को लेकर किए गए वादों पर वे क्यों कायम नहीं रहे? वे भाजपा से उन्हें पूरा क्यों नहीं करवा पाए? वे भाजपा सरकार में मंत्री हैं, फिर भी जिनके आरक्षण के अधिकारों के साथ समझौता हुआ है, उनसे मिलने जाते हैं, तो वे निजी मुलाकातों में उनसे कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ पिछड़े वर्गों के विरोधी हैं और उनकी बात नहीं सुनते। जब वे आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर भाजपा को चुनौती नहीं दे सकते, तो ऐसी क्या मजबूरी है जो उन्हें अपनी कुर्सी से चिपके रहने पर मजबूर कर रही है?”
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आईएएनएस से कहा, “मैंने वह पोस्ट पढ़ा और हमें यह भी पता है कि ओम प्रकाश राजभर का एक्स अकाउंट भाजपा आईटी सेल ने हैक कर लिया है। अब तो हमने यह भी सुना है कि उन्होंने पासवर्ड भी मांग लिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “ओम प्रकाश राजभर आज मानसिक रूप से इतने परेशान हो गए हैं कि शायद कुछ अधिकारियों द्वारा जब्त की गई उनकी आईडी अब उन्हें पासवर्ड के साथ वापस कर दी गई है। अब जब चुनाव आ गए हैं, तो वे नाटक कर रहे हैं और राजभर समुदाय को सम्मान दिलाने का दिखावा कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता आसिम वकार ने कहा, “राजभर साहब को कम से कम यह तो कहना चाहिए था कि अगर चार हिस्से होते हैं, तो राजभर समुदाय का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बनेगा। सिर्फ उनका बेटा ही क्यों बने? क्या राजभर का मतलब सिर्फ राजभर परिवार है?



