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Thursday, July 16, 2026
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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शूट नंबर 17 को रिप्रजेंटेटिव शूट माना था। हिन्दू पक्ष के दूसरे वादियों का कहना है कि उनके शूट अलग मुद्दे और दलीलों पर आधारित है| 

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मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। अब अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुख्य विवाद के साथ ही इस मामले में हिंदू पक्ष की तरफ से दाखिल तमाम याचिकाओं मे कौन सी याचिका रिप्रजेंटेटिव शूट बने, इस मुद्दे पर भी सुनवाई होनी थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शूट नंबर 17 को रिप्रजेंटेटिव शूट माना था। हिन्दू पक्ष के दूसरे वादियों का कहना है कि उनके शूट अलग मुद्दे और दलीलों पर आधारित है, इसलिए केवल शूट संख्या 17 को रिप्रजेंटेटिव शूट नहीं माना जा सकता है।

यह विवाद श्री कृष्ण जन्मभूमि और उसके निकट स्थित शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद उस स्थान पर बनी है जो भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है। हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण 17वीं सदी में औरंगजेब के शासनकाल में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बने प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़कर किया गया था। उनका कहना है कि यह स्थल भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी वैधता का दावा करता है। इस विवाद में मंदिर की जमीन पर स्वामित्व, पूजा का अधिकार और स्थल की पुरातात्विक जांच जैसे मुद्दे शामिल हैं। मस्जिद पक्ष का कहना है कि 1968 के समझौते के तहत यह विवाद पहले ही सुलझ चुका है।

इसके पहले 5 जुलाई को शाही ईदगाह कमेटी के सेक्रेटरी और वकील तनवीर अहमद ने लोगों से अपील की थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर भड़काऊ बयान देने से बचें। तनवीर अहमद ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर कई मामले कोर्ट में लंबित हैं। लंबित मामलों में भड़‌काऊ बयानबाजी उचित नहीं है, लोगों को कानून पर भरोसा रखना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि मस्जिद और मंदिर के रास्ते भी अलग हैं। मस्जिद में पांच वक्त नमाज होती है और मंदिर में भजन-पूजन। वैसे भी यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है, कहीं किसी प्रकार का विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि काफी लंबा समय बीत जाने के बाद अब आवाज उठाई जा रही है। ऐसे में जो मुकदमे न्यायालय में लंबित हैं तो फैसले का इंतजार करना चाहिए।

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