जमात-ए-इस्लामी के बहिष्कार के बीच तारीक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री

जमात-ए-इस्लामी के बहिष्कार के बीच तारीक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री

Tarique Rahman becomes Bangladesh's Prime Minister amid Jamaat-e-Islami boycott

बांग्लादेश में दो वर्षों की राजनीतिक अनिश्चितता के बाद मंगलवार (17 फरवरी)को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रमुख तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 17 वर्ष के निर्वासन से लौटकर 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में अपनी पार्टी को प्रचंड जीत दिलाने वाले तारीक देश आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझने के बीच सत्ता सँभालने वाले है। इसी बीच जमात-ए-इस्लामी ने तारिक रहमान के शपथग्रहण समारोह पर बहिष्कार डाला है।

299 सीटों पर हुए चुनाव में तारीक रहमान के नेतृत्व वाले BNP ने 212 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद उथल-पुथल ने BNP को यह बढ़त हासिल करने में मदद की। तारिक रहमान के शपथ के साथ ही बांग्लादेश को 37 वर्षों बाद एक पुरुष प्रधानमंत्री मिला है।

हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के दिन ही जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने समारोह का बहिष्कार कर दिया। विवाद इस बात पर था कि BNP सांसदों ने संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली। जमात और एनसीपी ने चेतावनी दी है कि यदि सुधार लागू नहीं किए गए तो वे सड़कों पर उतरेंगे और वैसे ही प्रदर्शन किए जाएंगे जो शेख हसीना के कार्यकाल में उन्हें सत्ता से हटाने के लिए किए गए थे।

तारीक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश में स्थिरता बहाल करने और इस्लामी हिंसक प्रदर्शनों के बाद पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की है। उन्हें अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ-साथ राजनीतिक सुधारों पर भी निर्णायक कदम उठाने होंगे। अंतरिम प्रशासन के प्रमुख मुहम्मद यूनुस द्वारा तैयार जुलाई चार्टर के तहत संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थानों में बदलाव का जनादेश दिया गया है। यह चार्टर जनमत-संग्रह में राष्ट्रीय चुनाव के साथ ही स्वीकृत हुआ था।

राजनीतिक अस्थिरता का असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। अवामी लीग शासन के दौरान तेज वृद्धि देखने वाली अर्थव्यवस्था हालिया अनिश्चितताओं से प्रभावित हुई है। ऐसे में नई सरकार के लिए आर्थिक पुनरुद्धार प्राथमिकता रहेगा।

विदेश नीति के मोर्चे पर ढाका-नई दिल्ली संबंधों को सुधारना भी अहम कार्यसूची में है। अंतरिम शासन के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में तनाव देखने को मिला था। शपथ समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तारीक रहमान को जीत की बधाई देने को दोनों देशों के रिश्तों में संभावित नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

तारीक रहमान के साथ उनकी मंत्रिपरिषद ने भी शपथ ली। कैबिनेट में 25 मंत्री और 24 राज्य मंत्री शामिल हैं, जिनमें दो टेक्नोक्रेट भी हैं। मंत्रिमंडल में एक हिंदू और एक बौद्ध सांसद को भी स्थान दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि तारीक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां राजनीतिक सुधार, आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय संतुलन की परीक्षा एक साथ होगी।

यह भी पढ़ें:

कम हुआ विदेशी मुद्रा भंडार, सोने की कीमतों में गिरवट का भी हुआ असर

इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो कल्पना और नवाचार का शक्तिशाली संगम

इमरान खान की सेहत पर सुनील गावस्कर और कपिल देव की अपील

Exit mobile version