उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है और चुनाव आयोग के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग का ध्यान उन शिकायतों की ओर आकर्षित किया है, जिनमें दावा किया गया है कि मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया विभिन्न स्थानों पर सामूहिक रूप से कराई जा रही है। मदरसों, मस्जिदों, दरगाहों, मुतवल्लियों और मुल्लाओं के घरों के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं के आवासों पर भी लोगों को एकत्र कर फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि जब भाजपा या अन्य विपक्षी दलों के बूथ लेवल एजेंट इन गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं, तब कथित रूप से उनसे कहा जाता है कि वे इसकी शिकायत जहां चाहें कर दें, किसी प्रकार का डर नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का उद्देश्य इस पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारना है। बेंगलुरु महानगरपालिका चुनाव को देखते हुए, जहां चुनाव आयोग पहले से एसआईआर चला रहा है, वहीं राज्य चुनाव आयोग के माध्यम से 27 वार्डों में अलग तरीके से समान प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण अभियान को कमजोर करने और उसे विफल करने की कोशिश की जा रही है।
प्रह्लाद जोशी ने इसे एक बड़ा षड्यंत्र बताते हुए कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के चुनाव आयोग के प्रयासों को ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है। यदि मतदाता सूची की निष्पक्षता प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावों की पारदर्शिता पर पड़ेगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कई सरकारी अधिकारी भी इस पूरे मामले में शामिल हैं और कथित रूप से डीके शिवकुमार के इशारे पर काम कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ऐसा ही हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि डीके शिवकुमार खुद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटता है तो उसकी जिम्मेदारी उनकी सरकार नहीं लेगी।
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