तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बीते साल बीआरएस से कांग्रेस में शामिल हुए दस में से नौ विधायकों ने रविवार शाम मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से उनके आवास पर मुलाकात की।
इस बैठक का समय बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष को आदेश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर इन विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता मामलों पर फैसला करें।
बैठक करीब एक घंटे तक चली, जिसमें कड़ियम श्रीहरी को छोड़कर सभी विधायक मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विधायकों ने स्पीकर गद्दाम प्रसाद कुमार द्वारा जारी नोटिसों पर चर्चा की। ये नोटिस सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जारी किए गए थे।
हालांकि विधायकों का कहना है कि बैठक का मकसद अपने-अपने क्षेत्रों के विकास के लिए मुख्यमंत्री से सहयोग मांगना था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि नोटिसों का जवाब देने और आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि स्पीकर तीन माह के भीतर इस मामले का निपटारा करें। विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है कि मार्च 2024 के बाद कांग्रेस में शामिल हुए सभी दस विधायकों को अयोग्य ठहराया जाए।
इन विधायकों में दानम नागेंद्र, टेल्लम वेंकट राव, कड़ियम श्रीहरी, पोचरम श्रीनिवास रेड्डी, एम. संजय कुमार, अरेकापुड़ी गांधी, टी. प्रकाश गौड़, बी. कृष्ण मोहन रेड्डी, जी. महिपाल रेड्डी और काले यादव शामिल हैं। इनमें से अधिकांश ने बीआरएस छोड़ कांग्रेस का दामन थामा था।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण से राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें स्पीकर के फैसले और इन विधायकों की राजनीतिक किस्मत पर टिकी हैं।
यह भी पढ़ें-



