मंदिरों पर नियंत्रण के पक्ष में नहीं सरकार, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रुख किया साफ़

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमला मामलें में सुनवाई के दौरान सरकार ने रखा पक्ष

मंदिरों पर नियंत्रण के पक्ष में नहीं सरकार, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रुख किया साफ़

The government is not in favor of controlling temples, the Center has made its stand clear in the Supreme Court.

सबरीमला मंदिर में महिलाओं की दर्शन लेने की याचिका से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के पक्ष में नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में हजारों मंदिर विभिन्न राज्य-नियंत्रित देवस्वम बोर्डों के अधीन संचालित हो रहे हैं। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान आस्था और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन जैसे अहम मुद्दों पर बहस हुई।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य पक्षों की व्याख्या से यह प्रतीत होता है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को उचित ठहराया जा रहा है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तुषार मेहता ने कहा कि उनके पूर्व के तर्कों को गलत तरीके से समझा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया, “सरकार मंदिरों को नियंत्रित नहीं करना चाहती” साथ ही उन्होंने जोड़ा कि उनका उद्देश्य केवल संविधान की व्याख्या करना था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 25 राज्य को धार्मिक संस्थानों की आर्थिक, राजनीतिक और अन्य गैर-धार्मिक गतिविधियों को विनियमित करने की अनुमति देता है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने पूछा कि क्या यह रुख केवल हिंदू संस्थानों पर लागू होता है। इस पर मेहता ने कहा कि संविधान को किसी एक धर्म के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए और कानून सभी धर्मों हिंदू, मुस्लिम, ईसाई पर समान रूप से लागू होता है।

न्यायमूर्ति बागची ने भी कहा कि ऐसी व्याख्याओं को धर्म के बजाय नागरिकों के नजरिए से देखना चाहिए। इस पर मेहता ने सहमति जताते हुए भारत की धार्मिक विविधता का उल्लेख किया।

बता दें की, देश में मंदिर प्रबंधन का मुद्दा लंबे समय से बहस का विषय रहा है। त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड जैसे संस्थान केरल में करीब 3,000 मंदिरों का संचालन करते हैं, जिनमें प्रसिद्ध सबरीमला अयप्पा मंदिर भी शामिल है।

इसी तरह तमिलनाडु में हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग 30,000 से अधिक मंदिरों का प्रबंधन करता है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम द्वारा तिरुपति बालाजी मंदिर का संचालन किया जाता है, जबकि उत्तराखंड में चारधाम बोर्ड बद्रीनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का प्रबंधन करता है।

ऐसे में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सांवैधानिक पीठ का अंतिम फैसला देशभर में धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और राज्य की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।

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