“केरल की धरती पर मुस्लिम लीग का राज, यहां कानून भी लीग ही तय करेगी”

मुख्यमंत्री चयन के बाद मुस्लिम लीग की नारेबाजी से विवाद

“केरल की धरती पर मुस्लिम लीग का राज, यहां कानून भी लीग ही तय करेगी”

"The Muslim League rules Kerala; the League will also decide the laws here."

केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) द्वारा वी. डी. सतीशन को मुख्यमंत्री घोषित किए जाने के बाद उकसाऊ नारेबाजी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इडुक्की जिले में कांग्रेस के सहयोगी दल मुस्लिम लीग द्वारा आयोजित एक मार्च के दौरान यह नारा लगाया गया कि, “जिस केरल की धरती पर लीग का शासन है, वहां कानून भी लीग ही तय करती है।” इसके साथ ही कुछ जातीय संगठनों के नेताओं पर भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।

शुरुआत में सतीशन के स्वागत में लगाए गए नारे बाद में तीखे राजनीतिक संदेशों में बदल गए। प्रदर्शन के दौरान नायर सेवा सोसायटी (एनएसएस) प्रमुख सुकुमारन नायर और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (एसएनडीपी) के महासचिव वेल्लापल्ली नटेशन को निशाना बनाया गया। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए, “यह वेल्लापल्ली कौन है? यह सुकुमारन कौन है? ध्यान से देखो, यह लीग है, पनक्कड़ की लीग।”

कुछ नारों में यह भी कहा गया कि, “आत्मसम्मान और अस्तित्व किसी के सामने गिरवी नहीं रखा जा सकता।” चुनाव से पहले पार्टी की आलोचना करने वाले वेल्लापल्ली नटेशन के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने की खबर है।

140 सदस्यीय केरल विधानसभा में 22 विधायकों वाली मुस्लिम लीग, कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस नेतृत्व द्वारा मुख्यमंत्री पद के लिए अंतिम निर्णय लेने से पहले ही मुस्लिम लीग ने सार्वजनिक रूप से वी. डी. सतीशन का समर्थन कर दिया था। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में के. सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के नाम भी शामिल थे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि केरल कांग्रेस मुस्लिम लीग के प्रभाव में काम करती है और उसके राजनीतिक एजेंडे का पालन करती है। भाजपा ने इस घटनाक्रम के बाद दावा किया है कि आने वाले पांच वर्षों तक केरल पर प्रभावी रूप से मुस्लिम लीग का ही नियंत्रण रहेगा।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि वी. डी. सतीशन की मुख्यमंत्री पद पर नियुक्ति मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव का परिणाम है, जिसे उन्होंने एक राजनीतिक इस्लामी संगठन बताया। हालांकि, इस विवाद के बाद मुस्लिम यूथ लीग ने अपनी इडुक्की जिला समिति को निलंबित कर दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम बढ़ते राजनीतिक दबाव और आलोचना के बीच नुकसान नियंत्रण की कोशिश के रूप में उठाया गया है।

 

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