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डॉलर संकट से जूझ रहा पाकिस्तान ने चीन के बाज़ार में युवान जुटाने के लिए तैयार

पहली बार जारी किया ‘पांडा बॉन्ड’

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गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ते विदेशी कर्ज और लगातार कमजोर होती वित्तीय स्थिति के चलते पाकिस्तान अब चीन के घरेलू पूंजी बाजार में झुकने तैयार है। पाकिस्तान ने पहली बार चीन में पांडा बॉन्ड जारी किया है, जिसके जरिए उसे चीनी मुद्रा युआन (RMB) में कर्ज मिलेगा। इसे पाकिस्तान आर्थिक रणनीति में बड़ा कदम दिखाने में लगा है, हालांकि विशेषज्ञ इसे चीन पर पाकिस्तान की बढ़ती आर्थिक निर्भरता और कर्ज़दाता अमेरिका से नाराज़गी मोड़ने के रूप में देख रहें है।

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने गुरुवार (14 मई)को चीन के घरेलू पूंजी बाजार में अपना पहला पांडा बॉन्ड जारी किया। इसकी जानकारी पाकिस्तान के वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी। खुर्रम शहजाद ने पोस्ट में लिखा, “यह पहला पांडा बॉन्ड 3 साल की फिक्स ब्याज दर वाला साधन है। इसके साथ ही यह चीन के घरेलू पूंजी बाजार में पाकिस्तान की पहली आरएमबी यानी चीनी युआन में जारी की गई सरकारी बॉन्ड बिक्री बन गई है।”

दरअसल, पांडा बॉन्ड ऐसा वित्तीय साधन होता है जिसमें कोई विदेशी देश या कंपनी चीन के निवेशकों से चीन की मुद्रा युआन में पैसा उधार लेती है। पाकिस्तान ने इस बॉन्ड को 3 साल की तय ब्याज दर पर जारी किया है। इसका मतलब है कि चीन के निवेशक पाकिस्तान को अभी पैसा देंगे और पाकिस्तान को तीन साल बाद यह राशि ब्याज समेत लौटानी होगी।

सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान पर एक और कर्ज जुड़ गया है, लेकिन इस बार डॉलर की जगह युआन में। पाकिस्तान सरकार इसे विदेशी मुद्रा संकट से राहत पाने के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि इसे चीन के निवेशकों का भरोसा हासिल करने के तौर पर पेश किया जा रहा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि इससे डॉलर पर निर्भरता कुछ कम होगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घट सकता है।

हालांकि आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर पाकिस्तान की वित्तीय हालत आने वाले वर्षों में नहीं सुधरी, तो इस कर्ज को चुकाना उसके लिए और मुश्किल हो सकता है। पहले से ही भारी विदेशी कर्ज में डूबा पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मित्र देशों से आर्थिक मदद मांग रहा है।

पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान ने कई मोर्चों पर उधारी बढ़ाई है। हाल ही में उसने 75 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए यूरोबॉन्ड जारी किया था। इसके अलावा सऊदी अरब से अतिरिक्त 3 अरब डॉलर जमा राशि के रूप में हासिल किए गए, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.4 अरब डॉलर वापस लौटाने पड़े।

हालांकि पाकिस्तान सरकार इसे एक सकारात्मक आर्थिक अवसर के रूप में पेश कर रही है, लेकिन सवाल यही है कि लगातार कर्ज लेकर चल रही अर्थव्यवस्था आखिर कब तक नए उधार के सहारे टिक पाएगी। अगर पाकिस्तान समय पर भुगतान करने में विफल रहता है, तो चीन पर उसकी वित्तीय निर्भरता और बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले वर्षों में उसकी आर्थिक और रणनीतिक स्वतंत्रता पर पड़ना लाज़मी है।

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