आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दीघा विधानसभा में कई स्थानीय समस्याएं हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं हुआ। बिहार में बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे अहम हैं।
उन्होंने महागठबंधन और भाकपा (माले) द्वारा उन पर जताए गए भरोसे का हवाला देते हुए कहा कि वह इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाएंगी। 2012 में पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कम अंतर से हार का जिक्र करते हुए दिव्या ने कहा कि मैं हारी नहीं, मुझे हराया गया। अब यह नहीं चलेगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महिला सशक्तिकरण के दावों पर तंज कसते हुए दिव्या ने कहा कि नीतीश कुमार ने महिलाओं को लॉलीपॉप थमाकर ठगा है। उनके खातों में 10,000 रुपए मदद के तौर पर भेजकर उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश की गई। आशा कार्यकर्ताओं और रसोइयों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। संविदा को नौकरी नहीं माना जा सकता।
दीघा विधानसभा सीट भाजपा की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। भाजपा ने यहां से संजीव चौरसिया को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, दीघा विधानसभा से महागठबंधन की ओर से भाकपा (माले) ने दिव्या गौतम को चुनावी मैदान में उतारा है।
भाकपा (माले) नेता शशि यादव ने आईएएनएस से कहा कि पटना विश्वविद्यालय में लगातार संघर्ष करने वाली दिव्या गौतम दीघा विधानसभा में बदलाव की आंधी लाएंगी।
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