सरकारी सूत्रों के अनुसार कि सीएम सतीशन को नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और विभिन्न संगठनों से पीएससी भर्तियों से जुड़े हालिया विवादों पर चिंता व्यक्त करने वाले अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।
सूत्रों ने कहा कि आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसे कार्यात्मक स्वायत्तता प्राप्त है और सरकार भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को जनहित का विषय मानती है और आगे की कार्रवाई तय करने से पहले चल रही सतर्कता जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा करेगी।
पीएससी द्वारा स्वयं आदेशित यह जांच पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में इसकी आंतरिक सतर्कता शाखा द्वारा संचालित की जा रही है। यह जांच योजना बोर्ड की रैंक सूची तैयार करने में अनियमितताओं के आरोपों से संबंधित शिकायतों के बाद शुरू की गई है।
आयोग ने आरोपों पर अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है और शिकायतों के सत्यापन के लिए जांच शुरू कर दी है।
प्लानिंग बोर्ड वाले मामले के बाद कुछ उम्मीदवारों और संगठनों ने पहले हुई कुछ भर्तियों की बारीकी से जांच की मांग फिर से उठाई है। इनमें केरल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (केएएस), असिस्टेंट इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (ओआईओ) और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस की भर्तियां शामिल हैं।
इन भर्तियों को लेकर पहले भी अलग-अलग समय पर शिकायतें सामने आई हैं, हालांकि अब तक किसी भी आधिकारिक जांच में कोई गड़बड़ी साबित नहीं हुई है।
इकोनॉमिक्स और स्टैटिस्टिक्स विभाग के लिए इस महीने हुई रिसर्च ऑफिसर परीक्षा को लेकर भी नई शिकायतें या सुझाव दिए गए हैं। उम्मीदवारों ने सिलेबस और मार्क्स के वेटेज में किए गए बदलावों पर स्पष्टीकरण मांगा है और प्रश्न पत्र की कुछ बातों पर भी सवाल उठाए हैं। उम्मीद है कि इन मुद्दों की जांच आयोग की तय शिकायत निवारण प्रक्रिया के ज़रिए की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार मुख्य रूप से इस बात से चिंतित है कि बार-बार आने वाली शिकायतें, चाहे उनका अंतिम परिणाम कुछ भी हो, राज्य की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती हैं।
हर साल लाखों उम्मीदवार पीएससी भर्तियों पर निर्भर होते हैं, इसलिए प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चल रही जांच को शीघ्रता से पूरा किया जाना चाहिए ताकि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित किसी भी अनिश्चितता का समाधान हो सके। सतर्कता जांच के परिणाम से आयोग की अगली कार्रवाई तय होने की उम्मीद है।
सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि यदि आगे हस्तक्षेप की आवश्यकता हुई, तो उस पर कोई भी निर्णय केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर लिया जाएगा।
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