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Friday, July 3, 2026
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एडवांस्ड सेल और जीन थेरेपी के नियमन के लिए सरकार ने ड्रग्स रूल्स में किया संशोधन!

सरकार का कहना है कि इस कदम से पूरे देश में इन आधुनिक चिकित्सा उत्पादों के लिए एक समान नियामक व्यवस्था लागू करने में मदद मिलेगी और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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केंद्र सरकार ने एडवांस्ड सेल और जीन थेरेपी जैसी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के नियमन को और प्रभावी बनाने के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत सेल या स्टेम सेल से बने उत्पादों, जीन थेरेपी उत्पादों और जेनोग्राफ्ट्स को सेंट्रली लाइसेंस अप्रूविंग अथॉरिटी (सीएलएए) के दायरे में शामिल किया गया है।

सरकार का कहना है कि इस कदम से पूरे देश में इन आधुनिक चिकित्सा उत्पादों के लिए एक समान नियामक व्यवस्था लागू करने में मदद मिलेगी और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

सरकार के अनुसार, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कुछ महत्वपूर्ण दवाओं और जैविक उत्पादों की निगरानी पहले से ही केंद्र और राज्य सरकारों की लाइसेंसिंग एजेंसियां मिलकर करती हैं। इनमें वैक्सीन, 100 मिलीलीटर से अधिक मात्रा वाले इंट्रावीनस (आईवी) सॉल्यूशन और रिकॉम्बिनेंट डीएनए आधारित दवाएं शामिल हैं। अब इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाकर नई चिकित्सा तकनीकों को भी इसमें शामिल किया गया है।

सरकार ने बताया कि सेल और स्टेम सेल आधारित उत्पादों का उपयोग रीजेनरेटिव थेरेपी और सीएआर-टी सेल थेरेपी जैसे आधुनिक उपचारों में तेजी से बढ़ रहा है। इनका इस्तेमाल ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में किया जाता है। वहीं, जीन थेरेपी उत्पादों का उपयोग जीन रिप्लेसमेंट और जीन एडिटिंग जैसी तकनीकों के जरिए आनुवंशिक बीमारियों और कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जा रहा है।

इसके अलावा, जेनोग्राफ्ट्स ऐसे चिकित्सा उत्पाद हैं, जो जानवरों के ऊतकों से तैयार किए जाते हैं। इनमें हार्ट वॉल्व जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स में प्रत्यारोपण के लिए किया जाता है।

सरकार का कहना है कि ये सभी तकनीकें तेजी से विकसित हो रही हैं और काफी जटिल हैं। ऐसे में इनके सुरक्षित इस्तेमाल और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी जरूरी है। इन उत्पादों को सीएलएए के दायरे में लाने से केंद्र और राज्य की लाइसेंसिंग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और पूरे देश में एक समान नियामक मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि यह संशोधन भारत के नियामक ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत करेगा। साथ ही, इससे स्वास्थ्य और लाइफ साइंसेज क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को सुरक्षित तरीके से अपनाने में मदद मिलेगी। सरकार ने इस संबंध में विस्तृत राजपत्र (गजट) अधिसूचना भी जारी कर दी है।

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