“ममता बनर्जी के कहने पर हिंदू विरोधी बातें कीं”

पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने कबूल किया

“ममता बनर्जी के कहने पर हिंदू विरोधी बातें कीं”

"They made anti-Hindu statements at the behest of Mamata Banerjee."

तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ गंभीर दावे करने के बाद पश्चिम बंगाल में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा सोशल मीडिया सेल के चीफ अमित मालवीय के एक वीडियो शेयर करने के बाद यह विवाद और बढ़ गया है, जिसमें कबीर कह रहे हैं कि ममता ने उनसे चुनाव के दौरान जातिवादी बयान देने के लिए कहा था।

वीडियो में हुमायूं कबीर कहते हैं कि ममता बनर्जी ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस के नेता यूसुफ पठान की चुनाव में जीत पक्की करने का निर्देश दिया था। उनका दावा है कि उन्होंने उन निर्देशों का पालन करने के लिए हिंदू समुदाय के खिलाफ भड़काऊ बातें कीं। कबीर का कहना है कि ऐसा ही एक भाषण 1 मई, 2024 को शाम 7 बजे और दूसरा 30 अप्रैल, 2024 को दिया गया था। उन्होंने उन बातों के लिए सबके सामने माफी मांगी और कहा कि उन्हें अपने हिंदू भाइयों और बहनों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का दुख है और उन्होंने एक बड़ी भीड़ के सामने अपना खेद जताया।

कबीर के इस बयान ने मुर्शिदाबाद के शक्तिपुर में बूथ वर्कर्स की एक मीटिंग में दिए गए उनके विवादित बयानों की ओर ध्यान खींचा है। उस कार्यक्रम में उन्होंने हिंदुओं को खुलेआम चेतावनी दी थी कि अगर तुम 70% हो, तो हम 30% हैं और आगे धमकी दी थी कि उन्हें दो घंटे में भागीरथी नदी में डुबो दिया जाएगा। उसी भाषण में उन्होंने काजीपाड़ा मस्जिद पर भी कमेंट किया और कहा कि अगर कोई सोचता है कि इसे गिराया जा सकता है और मुसलमान चुप रहेंगे, तो ऐसा कभी नहीं होगा।

कबीर के इन नए दावों ने राज्य में बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा हमला किया है और इस मामले को बहुत ज़्यादा तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण बताया है। पार्टी नेताओं ने कबीर के बयान और ऊपर से निर्देश मिलने के उनके दावे पर तृणमूल कांग्रेस लीडरशिप से जवाब मांगा है। तृणमूल कांग्रेस ने अभी तक कबीर के नए बयानों पर डिटेल में जवाब नहीं दिया है, लेकिन यह विवाद राज्य में राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।

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