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आधी आबादी को साथ लिए बिना संभव नहीं देश का सतत विकास: डॉ. प्रीति अडानी!

आज 3,500 से अधिक ग्रामीण महिलाएं इन डेयरी समितियों से जुड़ी हुई हैं और हर साल लगभग 75 लाख लीटर दूध का संग्रह करती हैं। 

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अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी ने गुरुवार को कहा कि इतिहास में कोई भी देश आधी आबादी को आर्थिक गतिविधियों से बाहर रखकर सतत विकास हासिल नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि भारत के समृद्ध इतिहास से सीख लेते हुए हमें महिलाओं की उस ताकत को पहचानना होगा, जो अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आ पाई है।

राष्ट्रीय राजधानी में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘सशक्त नारी, विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति अडानी  ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित कर डेयरी समूह बनाए गए हैं।

आज 3,500 से अधिक ग्रामीण महिलाएं इन डेयरी समितियों से जुड़ी हुई हैं और हर साल लगभग 75 लाख लीटर दूध का संग्रह करती हैं। इससे उनकी आय स्थिर हुई है, सौदेबाजी की ताकत बढ़ी है और सबसे महत्वपूर्ण, उनका आत्मविश्वास मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि देश के कई दूर-दराज ग्रामीण इलाकों में, जहां अदाणी फाउंडेशन काम कर रही है, वहां लड़कियों की शिक्षा का स्तर बहुत कम है। कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने कभी स्कूल तक का मुंह नहीं देखा और कॉलेज जाना तो उनके लिए दूर की बात है। ऐसे में शिक्षा और कौशल विकास बेहद जरूरी है।

प्रीति अडानी  ने जोर देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समग्र होना चाहिए। इसमें लड़कियों की शिक्षा, युवतियों के लिए कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं को वित्तीय सहायता, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य सुरक्षा, नेतृत्व प्रशिक्षण और महिला उद्यमों के लिए बाजार से जुड़ाव शामिल होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो लड़की स्कूल में बनी रहती है, उसके कम उम्र में विवाह की संभावना कम होती है और वह आगे पढ़ाई कर रोजगार के अवसर अपना सकती है। इसी तरह स्वास्थ्य सेवा, कृषि, डिजिटल सेवाएं, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवतियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

अडानी फाउंडेशन की अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए छोटे उद्यमियों को लोन उपलब्ध हुआ है। ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान ने देश के दूरस्थ इलाकों तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचाई हैं। वहीं प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना ने स्वच्छ ईंधन देकर लाखों महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान में सुधार किया है।

प्रीति अडानी  ने आगे कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए केवल लोन पर्याप्त नहीं है। उन्हें कौशल, डिजिटल ज्ञान, बाजार तक पहुंच, बुनियादी ढांचा, मार्गदर्शन और एक सहयोगी माहौल की भी जरूरत होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की अगली विकास गाथा स्कूलों, प्रशिक्षण केंद्रों, गांवों के उद्यमों और डिजिटल बाजारों में आत्मविश्वास से भरी महिलाओं द्वारा लिखी जाएगी।

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