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Tuesday, November 3, 2026
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नौकरी छोड़ो वरना मौत का सामना करो!

7,000 कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी

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जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक बार फिर धमकियां मिली हैं। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC), जो कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी हुई है, ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने की धमकी दी है, और चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें जानलेवा नतीजे भुगतने होंगे। इस धमकी के कारण, लगभग 7,000 कश्मीरी पंडित कर्मचारी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि इन कर्मचारियों के मोबाइल नंबर, घर का पता और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर जैसी पर्सनल जानकारी कथित तौर पर ऑनलाइन लीक हो गई है। इससे कश्मीरी पंडित समुदाय में डर का माहौल बन गया है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले एक महीने में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कम से कम पांच बार धमकियां मिली हैं। ULC द्वारा 1 सितंबर को जारी एक लेटर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों से नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ये धमकी भरे लेटर पहले डार्क वेब पर पब्लिश किए गए और फिर WhatsApp और Telegram के ज़रिए सर्कुलेट किए गए।

कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों ने इस घटना को डेटा सिक्योरिटी का गंभीर मामला बताया है। उन्होंने इस बात की हाई-लेवल जांच की मांग की है कि कर्मचारियों की पर्सनल जानकारी आतंकी संगठनों तक कैसे पहुंची। इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा और जम्मू-कश्मीर पुलिस की साइबर क्राइम विंग में शिकायत दर्ज कराई गई है और FIR दर्ज कर जांच की मांग की गई है।

केंद्र सरकार द्वारा कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए शुरू किए गए प्रधानमंत्री पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर में हजारों कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरी दी गई है। 2008 में पुनर्वास योजना शुरू होने के बाद 2015 में और सरकारी पदों को मंजूरी दी गई थी। अभी घाटी में 6,000 से ज़्यादा कर्मचारी काम कर रहे बताए जाते हैं। हालांकि, चूंकि उनमें से कई किराए के घरों में रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और गंभीर हो गई है।

कश्मीरी पंडित कामगारों के लिए बनाई गई ट्रांजिट कॉलोनियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। आरोप है कि कुछ घर दूर-दराज और असुरक्षित इलाकों में हैं, और यह भी आरोप है कि वहां सही सड़कें, फेंसिंग और सिक्योरिटी के इंतज़ाम नहीं हैं। इसलिए, ट्रांजिट कॉलोनियों और किराए के घरों की तुरंत सिक्योरिटी चेकिंग की मांग बढ़ रही है, ताकि धमकियों के पीछे के मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सके और वर्कर्स को पूरी सिक्योरिटी दी जा सके।

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