आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी के काफिले की गाड़ी से कुचलकर एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह हादसा बुधवार को सत्तेनपल्ली मंडल के रेंटापल्ली गांव में हुआ, जहां जगन रेड्डी एक प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे थे। मृतक की पहचान 54 वर्षीय चीली सिंगैय्या के रूप में हुई है, जो वेंगालयापालेम गांव के निवासी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थक थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही काफिला गुजर रहा था, सिंगैय्या फूल बरसाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे जगन रेड्डी की गाड़ी के बेहद करीब आ गए। वह नीचे गिर पड़े और गाड़ी का टायर उनके सिर के ऊपर से गुजर गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ दिख रहा है कि वाहन बिना रुके आगे बढ़ता रहा।
घायल अवस्था में सिंगैय्या को तुरंत गुंटूर सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने हादसे की पुष्टि की है। गुंटूर एसपी सतीश कुमार और गुंटूर रेंज के आईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने बताया कि हादसे की जांच जारी है। त्रिपाठी ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। शुरुआती जांच में पता चला है कि काफिले में 30 से 35 गाड़ियाँ थीं, जबकि अनुमति केवल तीन वाहनों की थी। यह जांच की जाएगी कि इतने सारे अनधिकृत वाहन काफिले में कैसे शामिल हो गए।”
So @ysjagan car just crushed a person on the road!
Why is he not arrested yet?@AndhraPradeshCM @APPOLICE100 @APDeputyCMO @ncbn pic.twitter.com/ASz1iSv4Px
— Squint Neon (@TheSquind) June 22, 2025
मृतक के परिजनों ने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह हादसा सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक असफलता का परिणाम है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सुरक्षा व्यवस्था चुस्त होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
घटना ने राज्यभर में आक्रोश फैला दिया है और वाईएसआरसीपी की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस हादसे के बाद सरकार की ओर से काफिला प्रबंधन की मौजूदा प्रणाली की समीक्षा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों की उम्मीद की जा रही है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि यह हादसा महज लापरवाही था या किसी स्तर पर जानबूझकर की गई चूक थी। फिलहाल, चीली सिंगैय्या की मौत ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था आम जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज कर रही है।
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