US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में अपनी स्पीच में ईरान के खिलाफ US मिलिट्री रुख का पुरजोर सपोर्ट किया है। ट्रंप ने बहुत कड़े शब्दों में तेहरान पर दबाव बढ़ाते हुए कहा, ‘ईरान को हमारे साथ डील करनी होगी, नहीं तो हमारे पास ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ को पूरी तरह खत्म करने का ऑप्शन है।’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि US में आने वाले नवंबर के चुनावों के बाद ईरान के साथ आखिरकार डील हो सकती है।
स्पीच में सीधा सवाल उठाते हुए ट्रंप ने कहा, ‘ईरान के पास अब सिर्फ दो ऑप्शन हैं—या तो वह ऐसी डील करे जिससे वह और ताकतवर देश बन जाए या मैं इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म कर दूं?’ उन्होंने साफ किया कि US के एक्शन के पीछे मेन रोल ईरान को किसी भी हालत में न्यूक्लियर वेपन हासिल न करने देना है। ट्रंप ने दावा किया कि वॉशिंगटन ने शुरू में बातचीत का रास्ता अपनाया; लेकिन आखिर में मिलिट्री कदम उठाने पड़े और इसीलिए वह ईरान को न्यूक्लियर वेपन हासिल करने से रोकने में कामयाब रहा।
दुनिया के दूसरे नेताओं से अपने नज़रिए की तुलना करते हुए ट्रंप ने कहा, “दूसरे लोग बातें करते थे, लेकिन मैंने कीं। जो लोग खोखली बातें करते थे, उनकी जगह मैंने असली शांति लाई। मेरी पॉलिसी खतरों का सामना करना है, न कि उन्हें अनदेखा करना।”
अपनी डिप्लोमैटिक सफलताओं का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने देशों के प्रमुखों के बयानों का ज़िक्र किया। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ के हवाले से कहा कि ट्रंप ने 30 मिलियन जानें बचाईं। उन्होंने अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति समझौते का भी क्रेडिट लिया, और कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने उनकी मध्यस्थता की तारीफ़ की थी। इस बीच, ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि 2025 के भारत-पाकिस्तान झगड़े को रोकने में उनकी अहम भूमिका थी; हालांकि, भारत ने हमेशा किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को साफ़ तौर पर मना कर दिया है।
यह भी पढ़ें-



