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“सिख दस्तार की आड़ में कुछ लोगों को सिख धर्म के मूल सिद्धांतों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं”: मनिंदर सिंग सिरसा

कनाडा में हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी उग्रवादियों के हमले पर जताया अफ़सोस !

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हाल ही में कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू श्रद्धालुओं को कनाडाई सरकार द्वारा पोषित खालिस्तानी उग्रवादीयों के हमले का शिकार होना पड़ा है। बता दें की कनाडा सरकार की खालिस्तानी अलगाववादियों के तुष्टिकरण की नीति के कारण भारत और कनाडा के रिश्तें ख़राब हुए है, जिसके नतीजे में कनाडा सरकार द्वारा पोषित खालिस्तानी हिंदूअल्पसंखयानकों पर नस्लभेदी हमलें कर रहे हैं। दरम्यान भाजपा नेता मनिंदर सिंग सिरसा ने इस नस्लवादी हमले की कड़ी निंदा की है।

उन्होंने इस हमले को लेकर दुःख जताया है, उन्होंने अपराध की कड़ी निंदा की है। भाजपा नेता ने अपने एक्स’ अकाउंट से ट्वीट कर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है, “आज कनाडा के एक मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं पर भारत-विरोधी तत्वों द्वारा किए गए हमले से मन बहुत दुखी है। मैं इस धार्मिक अपराध की कड़ी निंदा करता हूँ। यह न केवल न्याय के सिद्धांतों के ख़िलाफ है बल्कि श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के भी विरुद्ध है। सिख दस्तार की आड़ में कुछ लोगों को सिख धर्म के मूल सिद्धांतों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों से सिख समुदाय ने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में सम्मान अर्जित किया है। ऐसा लग रहा है कि सिख समुदाय के मान सम्मान को धूमिल करने की साजिश की जा रही है। मैं जत्थेदार अकाल तख्त साहिब से विनम्रतापूर्वक अपील करता हूँ कि वे इस जघन्य हमले की निंदा करें और किसी भी धार्मिक संस्थान पर इस तरह के हमलों के खिलाफ सख्त निर्देश जारी करें।”

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दौरान कनेडियन नॅशनल कौंसिल ऑफ़ हिंदूज ने कठोर कदम उठाते हुए इस हमले की निंदा की है। कौंसिल पुरे कनाडा में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को हिंदू मंदिरों एवं श्रद्धास्थानों में उपस्थित रहने, कार्यक्रमों में हिस्सा लेने और व्यासपीठों को साझा करने पर रोक लगाई है। हालांकि हर श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिरों में प्रवेश ले पाएगा लेकिन राजनेताओं को किसी भी कार्यक्रम और व्यासपीठ के लिए मंच नहीं देने का फैसला लिया गया है।

कौंसिल और हिंदू फेडरेशन ने एक साथ आकर इस फैसले को लागु किया है। साथ ही बताया गया है की नेताओं ने हिन्दुओ की सुरक्षा को नजरअंदाज किया है। इसीलिए जब तक हिंदुओ की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते राजनेताओं पर यह रोक जारी रहेगी।

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