उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को बुलंदशहर के अनूपशहर विधानसभा क्षेत्र स्थित खालौर स्टेडियम में आयोजित जनसभा के दौरान बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने चुनावी अभियान का शंखनाद किया। उन्होंने भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कार्यकर्ताओं से मायावती को पांचवीं बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लिए जुट जाने की अपील की।
जनसभा को संबोधित करते हुए आकाश आनंद ने महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को पर्याप्त रोजगार देने में विफल रही है। सरकारी विभागों में रिक्त पदों और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बसपा इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।
आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) नारे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नारे के जरिए बहुजन समाज को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए विपक्षी दलों की राजनीति को निशाने पर लिया।
अपने संबोधन में आकाश आनंद ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि पार्टी चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “जितनी परीक्षा लेना चाहें, मैं तैयार हूं।” उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की राजनीतिक तैयारी और संगठनात्मक सक्रियता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
जनसभा के दौरान आकाश आनंद ने भाजपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए मनोज प्रधान को अनूपशहर विधानसभा सीट और मुकेश पंडित को शिकारपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया। टिकट की घोषणा के बाद मनोज प्रधान मंच पर दंडवत हो गए। उन्होंने क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहने और लोगों की सेवा करने का संकल्प जताया।
सभा में बसपा जिलाध्यक्ष रविंद्र प्रधान, मुनकाद अली सहित पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा का यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की रणनीति महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों के जरिए अपना जनाधार मजबूत करने की है। हालांकि, चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने संगठन को कितना सक्रिय कर पाती है और जनता के बीच अपने राजनीतिक संदेश को कितना प्रभावी बना पाती है।
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