भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा देकर देश की राजनीति को चौंका दिया है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को त्यागपत्र सौंपा, जिसमें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(ए) का हवाला दिया गया है। धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और उनके कार्यकाल के अभी दो वर्ष शेष थे।
धनखड़ ने अपने इस्तीफे में जिस अनुच्छेद 67(ए) का उल्लेख किया है, वह उपराष्ट्रपति द्वारा स्वेच्छा से अपने पद से इस्तीफा देने की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। भारतीय संविधान के इस प्रावधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति यदि इस्तीफा देना चाहता है तो उसे अपने हस्ताक्षरित पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए त्यागपत्र देना होता है। यह इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा प्राप्त होते ही प्रभावी हो जाता है।
संविधान के अनुच्छेद 67 में उपराष्ट्रपति के पद, कार्यकाल और इस्तीफे से जुड़ी सभी शर्तें वर्णित हैं। यह अनुच्छेद न केवल उपराष्ट्रपति के इस्तीफे का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि उपराष्ट्रपति को केवल राष्ट्रपति को ही अपना त्यागपत्र देना होता है, न कि संसद या किसी अन्य संस्था को।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चूंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, ऐसे में यह संवैधानिक पद अधिक समय तक रिक्त नहीं रह सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ होगी ताकि उच्च सदन के कामकाज में कोई रुकावट न आए।
धनखड़ पिछले एक वर्ष से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। हाल ही में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें नैनीताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, उनकी बीमारी की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
जगदीप धनखड़ का राजनीतिक और संवैधानिक जीवन लंबा और सक्रिय रहा है। वे राजस्थान के पूर्व राज्यपाल और अनुभवी वकील भी रह चुके हैं। उनके इस्तीफे के बाद देश में नए उपराष्ट्रपति के चयन की दिशा में संवैधानिक प्रक्रिया अब तेज़ी से आगे बढ़ेगी।
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