लोकसभा में आज वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पेश किया जाएगा, जिसे लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। स्पीकर ओम बिरला ने इस पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया है। जहां जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इसे जनकल्याणकारी बताया, वहीं विपक्षी दलों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है।
मीडिया से बातचीत में जगदंबिका पाल ने विश्वास जताते हुए कहा, “सरकार ने इस बिल को छह महीने की मेहनत के बाद तैयार किया है। विपक्ष दावा कर रहा था कि यह विधेयक बिहार चुनाव तक लटक जाएगा, लेकिन सरकार इसे लेकर आई है और यह पास होगा। इससे गरीब, पिछड़े और आम मुसलमानों को लाभ मिलेगा, जो अभी तक नहीं मिल पा रहा था।”
उन्होंने आगे कहा, “वक्फ की अपार संपत्ति के बावजूद, इसकी बिक्री को लेकर विवाद उठते रहे हैं। 2013 के यूपीए संशोधन ने वक्फ बोर्ड को ऐसे अधिकार दे दिए थे, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 300ए का उल्लंघन करते थे। अब हम इसे सुधार रहे हैं।” पाल ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा, “राहुल गांधी को संविधान की कितनी समझ है? वे अपनी ही सरकार के बिल को फाड़ देते थे। पहले विधेयक को पढ़ें, फिर चर्चा करें।”
विपक्ष का हमला:
सपा नेता अबू आजमी ने इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताते हुए कहा, “अगर यह बिल पास हुआ, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। हमारी पूरी कोशिश होगी कि इसे रोका जाए। सरकार की नीयत मुसलमानों के लिए ठीक नहीं है। वे हमारा निजी कानून खत्म करना चाहते हैं। हर मस्जिद के नीचे मंदिर ढूंढते हैं, सड़क पर पांच मिनट की नमाज पर कार्रवाई होती है। यह भेदभाव क्यों?”
उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम संगठन इसके खिलाफ रणनीति बनाएंगे और बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे।
कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि इंडिया ब्लॉक इस बिल का पुरजोर विरोध करेगा। उन्होंने बताया कि “कल संसद में इंडिया ब्लॉक की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से इस विधेयक के खिलाफ खड़े होने का निर्णय लिया गया।” कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा, “यह विधेयक वक्फ संपत्तियों और निजी जमीनों पर सरकार के दखल को बढ़ाएगा, जिससे बड़े वर्ग को नुकसान होगा। इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।”
कपिल सिब्बल का सरकार पर तंज: राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस विधेयक को एक धर्म विशेष के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, “बीते वर्षों में लव जिहाद, थूक जिहाद, फ्लड जिहाद जैसे मुद्दे उठाकर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया है। अब यह विधेयक उसी एजेंडे का हिस्सा है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर सरकार सुधार लाना चाहती है, तो हिंदू धर्म में भी बदलाव करें। ट्रिपल तलाक कानून बनाया, लेकिन हिंदू महिलाओं को घर से निकाले जाने पर क्या किया? मस्जिद गिरती है, संभल में हंगामा होता है और सरकार चुप रहती है। अगर न्याय की बात करते हैं, तो सभी के लिए करें, नहीं तो यह संविधान के खिलाफ होगा।”
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि विपक्षी दल इस बिल को रोकने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं और संसद में वोटिंग के दौरान किस पार्टी का क्या रुख रहता है।
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