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पश्चिम बंगाल: SIR के दौरान बांग्लादेशी अवैध मतदाता का खुलासा करने पर आदिवासी महिला BLO पर जूतों से हमला

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पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान एक गंभीर घटना सामने आई है। हुगली जिले के डाकुनी शहर के वार्ड नंबर-2 में एक महिला बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) पर अवैध मतदाता और बांग्लादेशी नागरिक ने जूतों से हमला किया गया। BLO ने एक अवैध मतदाता की पहचान कर इसकी सूचना उच्च अधिकारियों देने के बाद यह हमला किया गया।

पीड़िता की पहचान बिमली टुडू हांसदा के रूप में हुई है, जो आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। आरोप है कि उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान पाया कि आरोपी अब्दुल रहीम गाज़ी का नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है और वह अवैध रूप से मतदाता के रूप में अपना नाम जुड़वाने की कोशिश कर रहा था।

बिमली टुडू हांसदा के अनुसार, आरोपी खुद को भारतीय नागरिक दिखाने के लिए बर्दवान जिले के एक व्यक्ति को अपना अभिभावक बताकर नाम दर्ज कराने का प्रयास कर रहा था। जब उन्होंने इस अनियमितता की सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी, तो इसके बाद आरोपी और उसके परिवार के लोगों ने BLO पर हमला कर दिया।

पीड़िता ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, “वह बांग्लादेशी नागरिक है। मैंने इसकी जानकारी अपने अधिकारियों को दी। इसके बाद अब्दुल और उसके परिवार ने मुझ पर हमला किया। उसने मुझे जूते से मारा। मेरे पड़ोसियों ने यह सब देखा। उसकी पत्नी ने मेरे घर पर हंगामा किया। मैंने पुलिस को इसकी सूचना दे दी है।”

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि हमले के समय आसपास के लोगों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद मामला और बिगड़ने से बचा। पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच की जा रही है।

हालांकि, इस पूरे प्रकरण में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पीड़िता के प्रति सहानुभूति जताने के बजाय सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने BLO की कार्यप्रणाली और अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाने में लगी हैं। स्थानीय TMC पार्षद शेख अशरफ हुसैन उलटे आदिवासी महिला पर आरोप लगा रहें है कि वह अपने साथ 10 महिलाओं को लेकर आरोपी अब्दुल रहीम गाज़ी के घर गई थीं और कथित तौर पर उसका कॉलर पकड़कर उस पर दबाव बनाया।

शेख अशरफ हुसैन का दावा है कि इसी कथित व्यवहार के कारण आरोपी उकसाया गया और इसके बाद यह हिंसक घटना हुई। हालांकि, इस दावे पर BLO या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में SIR अभियान के तहत मतदाता सूची की गहन जांच की जा रही है, ताकि अवैध मतदाताओं और फर्जी नामों की पहचान की जा सके। एक महिला और आदिवासी सरकारी कर्मचारी पर इस तरह का हमला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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