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पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के घर ईडी की फिर छापेमारी

चुनाव से पहले जांच तेज

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पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित स्कूल नौकरी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (11 अप्रैल)को पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास पर ताजा छापेमारी की। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, ED की टीम शनिवार सुबह करीब 10:45 बजे कोलकाता के नाकतला स्थित चटर्जी के आवास पर पहुंची। केंद्रीय बलों की मौजूदगी में पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और इसके बाद करीब पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान एजेंसी ने पूर्व मंत्री से पूछताछ भी की।

इसी के साथ ईडी की एक अन्य टीम ने राजारहाट स्थित प्रसन्न कुमार रॉय के कार्यालय पर भी छापा मारा। एजेंसी के मुताबिक, रॉय इस कथित भर्ती घोटाले में एक अहम बिचौलिया है, जिसका संबंध पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग (SSC) से जुड़ी नियुक्ति अनियमितताओं से बताया जा रहा है।

तलाशी अभियान शाम करीब 4:30 बजे समाप्त हुआ। हालांकि, ईडी अधिकारियों ने बाहर मौजूद मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और पार्थ चटर्जी भी सामने नहीं आए।

सूत्रों के मुताबिक, यह ताजा कार्रवाई  चटर्जी ने जमानत पर रिहाई के बाद ईडी द्वारा जारी किए गए तीन समन का जवाब न देने के कारण की गई। जांच एजेंसी सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति में कथित गड़बड़ियों को लेकर और जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।

बता दें की पार्थ चटर्जी कभी ममता बनर्जी सरकार में एक प्रभावशाली मंत्री रहे हैं। उन्हें 23 जुलाई 2022 को ईडी ने शिक्षा भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया था। उस समय उनके और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी में 50 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और भारी मात्रा में सोने के आभूषण बरामद किए गए थे।

करीब 39 महीने जेल में बिताने के बाद चटर्जी को सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों से सशर्त जमानत मिली थी, जिसके बाद 11 नवंबर 2025 को उन्हें रिहा किया गया। जमानत की शर्तों के तहत उन्हें पासपोर्ट जमा करना और अपनी आवाजाही को ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र तक सीमित रखना अनिवार्य है। ईडी ने इस पूरे मामले में चटर्जी को “मास्टरमाइंड” बताया है, जिसमें उनके कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर अवैध नियुक्तियां कराई गईं।

इस घोटाले का राजनीतिक असर भी बड़ा रहा है। गिरफ्तारी के बाद पार्थ चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया गया और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उन्हें निलंबित कर दिया। इतना ही नहीं, पार्टी ने 2026 विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें बेहाला पश्चिम सीट से टिकट भी नहीं दिया, जहां से वह 2006 से लगातार चार बार विधायक रहे थे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में होना है। ऐसे में ईडी की यह कार्रवाई चुनावी माहौल में TMC के पुराने कारनामों की चर्चा होना और सत्तापक्ष के लिए चुनौती साबित होने जा रही है।

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