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Wednesday, June 24, 2026
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अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में ‘ज्योति स्वरूप’ को लेकर उठा विवाद

सोशल मीडिया पर 'कृत्रिमता' को लेकर उठे सवाल

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अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में स्थापित एक प्रतीकात्मक ‘ज्योति स्वरूप’ को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ यूज़र्स ने इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसके कृत्रिम होने पर नाराजगी जताई है, जबकि मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि यह स्थापना पूरी तरह वैदिक विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के तहत की गई है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा 11 अप्रैल को किए गए एक आधिकारिक पोस्ट के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में उस स्थान पर ‘ज्योति स्वरूप’ स्थापित किया गया है, जहां पहले भगवान राम की मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व अस्थायी रूप से रखा गया था। ट्रस्ट ने बताया कि मंदिर निर्माण के दौरान यही स्थान पूजन का केंद्र रहा और अब मुख्य गर्भगृह पूर्ण होने के बाद इस स्थल को प्रतीकात्मक रूप से चिह्नित करने के लिए ज्योति स्थापित की गई है।

ट्रस्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया को विधिवत पूजा-पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया गया। हालांकि, इस कदम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ यूज़र्स ने आपत्ति जताई है।

एक यूज़र य ने इस ज्योति की ‘कृत्रिमता’ बताते हुए पारंपरिक ‘अखंड ज्योति’ की परंपरा से विचलन का आरोप लगाया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा,”क्या भारत भूमि से अखंड ज्योति जलाने की परंपरा लुप्त हो गई है जो यह चाइनीज खिलौना ज्योति के नाम पर यहां रखा गया है?” उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी सवाल किया कि क्या, “क्या वास्तविक ज्योति को बनाए रखने जितना भी श्रम आपके इतने बड़े ट्रस्ट के लिए भारी पड़ रहा है?

इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर व्यापक बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे परंपरा से हटकर कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे एक प्रतीकात्मक धार्मिक अभिव्यक्ति मानते हुए ट्रस्ट के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं।

फिलहाल, मंदिर ट्रस्ट की ओर से प्रारंभिक स्पष्टीकरण के अलावा कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यह मामला अब धार्मिक परंपराओं और उनके आधुनिक स्वरूप के बीच संतुलन को लेकर एक बड़े विमर्श का रूप लेता जा रहा है।

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