अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले जहाजों पर नाकाबंदी शुरू करेगी। यह फैसला पाकिस्तान के इस्लामाबाद में युद्धविराम की वार्ता को लेकर असफलता के बाद लिया गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह नाकाबंदी सोमवार सुबह 10 बजे (EDT) से लागू होगी, जो ईरान के समयानुसार शाम 5:30 बजे के आसपास है। CENTCOM ने कहा है कि यह कार्रवाई सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, हालांकि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक आमने-सामने बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। दो सप्ताह से जारी अस्थायी युद्धविराम अब अनिश्चितता में है, जबकि सातवें सप्ताह में पहुंच चुके इस संघर्ष ने हजारों लोगों की जान ली है और वैश्विक बाजारों को झकझोर कर रख दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत में ईरान के रुख को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा,“मुझे परवाह नहीं कि वे वापस आते हैं या नहीं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा।” ट्रंप का यह भी आरोप है कि ईरान अब भी परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में प्रयासरत है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इस नाकाबंदी का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा। एनर्जी पॉलिसी रिसर्च फाउंडेशन के विशेषज्ञ माइकल लिंच का अनुमान है कि इस कदम से तेल की कीमतों में 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक की बढ़ोतरी हो सकती है। उनके मुताबिक, यह नाकाबंदी रोजाना करीब 20 लाख बैरल तेल की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है, जबकि ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष के कारण पहले ही लगभग 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हो चुकी है।
ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत का मानक है, युद्ध से पहले फरवरी में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो बाद में बढ़कर 119 डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि शुक्रवार को ‘युद्धविराम’ की घोषणा के बाद 0.8% की गिरावट के साथ यह 95.20 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। और फिलहाल इस्लामाबाद वार्ता की असफलता के बाद इसकी कीमत फिर $100 पार चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रहती है, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है। हालांकि, माइकल लिंच का यह भी कहना है कि बढ़ती कीमतों के दबाव के चलते अमेरिका इस निर्णय को जल्द वापस भी ले सकता है।
कुल मिलाकर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी का यह फैसला न केवल पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ाएगा, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी गहराई से पड़ने की संभावना है।
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