मुंबई के सबसे बड़े गणेशोत्सव पंडाल लालबागचा राजा ने इस साल हुई नीलामी में ₹1.65 करोड़ की राशि जुटाई। गुरुवार (11 सितंबर)शाम को लालबाग मार्केट स्थित पंडाल मंच पर हुई इस नीलामी में भक्तों द्वारा दान किए गए 108 सोने और चाँदी के आभूषण और वस्तुएँ शामिल थीं।
सोने की बिस्किट ने मारी बाज़ी
लालबागचा राजा सर्वजनिक गणेशोत्सव मंडल के चेयरमैन बालासाहेब कांबले ने बताया कि नीलामी में सबसे महँगी बिकने वाली वस्तु 100 ग्राम की सोने की बिस्किट रही, जिसे भक्त राजेंद्र लंजवाल ने ₹11 लाख में खरीदा।
नीलामी का यह आँकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वजह सोने-चाँदी की बढ़ती कीमतें हो सकती हैं। शुक्रवार को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,12,000 प्रति 10 ग्राम था, जो एक महीने पहले तक लगभग ₹1,00,000 और पिछले साल ₹75,000 प्रति 10 ग्राम था। यानी एक साल में दाम 40% से ज्यादा बढ़े हैं।
हर साल होती है नीलामी
लालबागचा राजा मंडल हर साल गणेशोत्सव में प्राप्त सोने-चाँदी को सार्वजनिक नीलामी में बेचता है। भक्त इन वस्तुओं को प्रसाद मानकर बोली लगाते हैं।
2024 में मंडल को नकद ₹5.65 करोड़, 4.15 किलो सोना और 64.32 किलो चाँदी दान में मिले थे। उस दौरान 990.6 ग्राम की सोने की चेन ₹69.31 लाख में बिकी थी। 2023 में मंडल को नीलामी से ₹80.70 लाख की आय हुई थी, जब 110 वस्तुएँ नीलाम की गई थीं।
लालबागचा राजा को ‘नवसाचा राजा’ भी कहा जाता है, इस साल अपने 92वें वर्ष में मनाया गया। यह प्रतिमा भक्तों की मनोकामना पूरी करने वाली मानी जाती है। संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपति यहाँ विशेष रूप से आते हैं। परंपरा के अनुसार, इच्छा पूरी होने पर वे चाँदी का पालना दान करते हैं, जिसे बाद में अन्य दंपतियों को प्रसादस्वरूप दिया जाता है।
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