2008 के मालेगांव बम धमाके के मामले में विशेष NIA अदालत द्वारा सभी सात आरोपियों को बरी किए जाने के बाद, भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि “हिंदू आतंकवाद की थ्योरी गढ़ने वालों का आज मुंह काला हो गया है।”
साध्वी प्रज्ञा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा,“भगवा आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद के जन्मदाता कांग्रेस सहित सभी विधर्मियों का मुंह हुआ काला.. भगवा ,हिंदुत्व और सनातन की विजय पर समस्त सनातनियों और देशभक्तों का हुआ बोलबाला बहुत-बहुत बधाई…. जय हिन्दूराष्ट्र, जय श्री राम…”
भगवा आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद के जन्मदाता कांग्रेस सहित सभी विधर्मियों का मुंह हुआ काला..
भगवा ,हिंदुत्व और सनातन की विजय पर समस्त सनातनियों और देशभक्तों का हुआ बोलबाला बहुत-बहुत बधाई….
जय हिन्दूराष्ट्र, जय श्री राम…— Sadhvi Pragya Singh Thakur (@sadhvipragyag) August 1, 2025
मंगलवार, 31 जुलाई 2024, को एनआईए की विशेष अदालत ने 2008 मालेगांव विस्फोट केस में आरोपी बनाए गए सभी सात लोगों को बेकसूर करार देते हुए बरी कर दिया, जिनमें साध्वी प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित भी शामिल थे। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध नहीं कर सका कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा की थी या बम कर्नल पुरोहित ने रखा था।
फैसला सुनाए जाने के बाद साध्वी प्रज्ञा कोर्ट रूम में फूट-फूटकर रो पड़ीं और हाथ जोड़कर जज से कहा,“मुझे 13 दिन तक लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई। मेरी पूरी जिंदगी नष्ट हो गई। 17 साल तक मुझे अपमानित किया गया। मेरे ही देश में मुझे आतंकवादी कहा गया।” उन्होंने आगे कहा, “मैं संन्यासी हूं, शायद इसीलिए जिंदा रह सकी। भगवा को आतंकवाद का प्रतीक बताया गया था, लेकिन आज भगवा जीत गया। हिंदुत्व को आतंकवाद से जोड़ने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।”
29 सितंबर 2008 को नासिक जिले के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मालेगांव शहर में भिक्कू चौक मस्जिद के पास खड़ी एक मोटरसाइकिल में बम विस्फोट हुआ था। घटना रमजान के दौरान और नवरात्रि से ठीक पहले हुई थी, जिसमें 6 लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हुए थे। इस हमले को लेकर भारी राजनीतिक और धार्मिक बवाल मचा था।
साध्वी प्रज्ञा की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘भगवा आतंकवाद’ या ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्दों को लेकर वर्षों तक देश की राजनीति में तीखी बहस होती रही है। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस पर इस थ्योरी को गढ़ने और सनातन संस्कृति को बदनाम करने का आरोप लगाया।
अब जबकि अदालत ने सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है, साध्वी प्रज्ञा और उनके समर्थकों का कहना है कि यह हिंदुत्व की वैचारिक विजय है और एक राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश।
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