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संसद से शुरू हुई भारत की ओलिम्पिक तैयारी, दो विधेयक पारित !

राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी

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भारतीय खेल प्रशासन और एथलीट संरक्षण में ऐतिहासिक सुधार की दिशा में संसद ने मंगलवार (12 अगस्त)को दो अहम विधेयक, राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी। इनका उद्देश्य खेल संगठनों में पारदर्शिता बढ़ाना, एथलीट कल्याण को प्राथमिकता देना और भारत को वैश्विक एंटी-डोपिंग मानकों के अनुरूप बनाना है। यह कदम देश की 2036 ओलंपिक की मेजबानी की महत्वाकांक्षा को भी मजबूती देगा।

केंद्रीय खेल मंत्री मंसुख मांडविया ने इसे खेलों में नैतिक शासन और खिलाड़ी केंद्रित खेल नीति की दिशा में निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि ये कानून भारत के खेल भविष्य को नया आयाम देंगे।

राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025

इस कानून के तहत खिलाड़ियों को खेल संगठनों के निर्णय-निर्माण में अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। ट्राइब्यूनल फॉर स्पोर्ट्स डिस्प्यूट्स का गठन कर विवादों का त्वरित निपटारा किया जाएगा, जिससे लम्बी अदालती प्रक्रिया पर निर्भरता कम होगी। इस विधेयक के जरिए महिला प्रतिनिधित्व को अनिवार्य किया गया है ताकि सभी खेल निकायों में लैंगिक विविधता सुनिश्चित हो। साथ ही, अधिकारियों के लिए कार्यकाल की सीमा, पारदर्शी चुनाव और वित्तीय विवरण का सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य होगा।

इससे खिलाड़ियों के चयन और नीतिगत निर्णयों में देरी कम होगी, सत्ता का केंद्रीकरण रोका जाएगा और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के मानकों के अनुरूप शासन संरचना विकसित होगी।

राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक, 2025

यह संशोधन भारत के कानूनों को वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) कोड 2021 के अनुरूप लाता है। इसमें डोपिंग में लिप्त एथलीट, कोच या अधिकारियों के लिए कड़ी सज़ा, सुनवाई और अपील प्रक्रिया में तेजी, प्रतियोगिता से बाहर परीक्षण की संख्या में वृद्धि और उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं का प्रावधान शामिल है।

इससे भारत की वैश्विक खेल मंचों पर साख मजबूत होगी, स्वच्छ खिलाड़ियों की सुरक्षा होगी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचाव सुनिश्चित होगा।

इन दोनों कानूनों को भारतीय खेल जगत में संरचनात्मक बदलाव और एथलीट-प्रथम दृष्टिकोण की दिशा में मील का पत्थर माना गया है, साथ ही भारत के ओलंपिक लक्ष्य पूरा करने के लिए संसद के भीतर से उठाया गया यह अहम् कदम कहा जा रहा है।

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