भारतीय एथलेटिक्स को वैश्विक स्तर पर बड़ा झटका लगा है। वर्ल्ड एथलेटिक्स ने भारत को अत्यंत उच्च (Extremely High) डोपिंग जोखिम वाले देशों की श्रेणी में रख दिया है। इस फैसले के बाद अब भारतीय खिलाड़ियों पर कड़ी निगरानी और सख्त एंटी-डोपिंग नियम लागू होंगे।
यह निर्णय एथलेटिक्स अखंडता इकाई (AIU) ने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) को कैटेगरी B (मध्यम जोखिम) से कैटेगरी A (सबसे उच्च जोखिम) में अपग्रेड कर अत्यंत उच्च डोपिंग जोखिम वाले देशों की श्रेणी में रख दिया है। AIU के चेयरमैन डेविड होमन ने कहा, “भारत में डोपिंग की स्थिति लंबे समय से उच्च जोखिम वाली रही है और घरेलू एंटी-डोपिंग कार्यक्रम इसकी तुलना में पर्याप्त नहीं है।”
नई श्रेणी में आने के बाद भारतीय एथलीट्स को अब पहले से कहीं ज्यादा डोपिंग टेस्ट का सामना करना पड़ेगा। प्रतियोगिता के दौरान ही नहीं, बल्कि ट्रेनिंग के समय भी बिना किसी पूर्व सूचना के टेस्ट किए जा सकेंगे। इसके अलावा, खिलाड़ियों को एथलीट बायोलॉजिकल पासपोर्ट सिस्टम के तहत ब्लड टेस्ट से भी गुजरना होगा, जिससे समय के साथ उनके जैविक संकेतकों पर नजर रखी जाएगी और किसी भी संदिग्ध बदलाव को पकड़ा जा सकेगा।
ओलंपिक खेल और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे बड़े आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए अब अतिरिक्त शर्तें लागू होंगी।
इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने से पहले, खिलाड़ियों को AUI द्वारा निर्धारित प्रवेश की समय सीमा से पहले के 10 महीनों के भीतर कम से कम तीन बार बिना पूर्व-सूचना के प्रतियोगिता से बाहर भी परीक्षण करने होंगे।
सख्त नियम केवल भारत में मौजूद खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेंगे। जो खिलाड़ी विदेश में प्रशिक्षण कर रहे हैं, उन्हें भी परिक्षण में शामिल रहना होगा और उनकी भी नियमित निगरानी की जाएगी। सभी टेस्ट और उनके परिणामों का रिकॉर्ड AIU के साथ साझा करना अनिवार्य होगा।
हाल के वर्षों में भारत में डोपिंग के मामलों में लगातार वृद्धि ने चिंता बढ़ाई है। AIU के आंकड़ों के मुताबिक:
- 2022 में 48 मामले (विश्व में दूसरे स्थान पर)
- 2023 में 63 मामले (विश्व में दूसरे स्थान पर)
- 2024 में 71 मामले (विश्व में सबसे ज्यादा)
- 2025 में अब तक 30 मामले (फिलहाल सबसे ज्यादा)
इसके अलावा, वर्तमान में 148 भारतीय एथलीट्स डोपिंग उल्लंघन के कारण अयोग्य घोषित हो चुके हैं, यह संख्या किसी भी अन्य देश से अधिक है।
नई श्रेणी के तहत AFI को एक एंटी-डोपिंग मॉनिटरिंग कमेटी बनानी होगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप टेस्टिंग प्रोग्राम लागू करना होगा। AIU हर तीन साल में इन जोखिम श्रेणियों की समीक्षा करता है, हालांकि सुधार होने पर पहले भी बदलाव संभव है।
यह भी पढ़ें:
लाइफस्टाइल बदलाव से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कंट्रोल, जानें लक्षण कारण और उपाय
इस सरल वैज्ञानिक फॉर्मूले से अपने बच्चे की पूरी लंबाई को करें अनलॉक
ईरान ने दबाव में बातचीत से किया इनकार; अमेरिका को दी नए युद्ध विकल्पों की चेतावनी



