रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपने अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDD&IS) Mk-IIA का फील्ड ट्रायल 13 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश के कुरनूल रेंज में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह ट्रक-माउंटेड 30 किलोवॉट लेजर आधारित डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन सिस्टम (DEW) है, जो 3.5 से 5 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद फिक्स्ड-विंग UAV और ड्रोन झुंडों को निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है। यह प्रणाली या तो ड्रोन की संरचना को नुकसान पहुंचाकर या उसके सेंसर को बेअसर कर दुश्मन की क्षमताओं को कुंद (सुस्त) करती है।
इस सफलता से पहले DRDO ने 2 किलोवॉट लेजर सिस्टम का उपयोग एलओसी के पास एक चीनी ड्रोन को गिराने में किया था, और 10 किलोवॉट सिस्टम को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को सीरियल उत्पादन के लिए सौंपा गया था। 30 किलोवॉट क्षमता वाली यह प्रणाली भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है जिनके पास अत्याधुनिक लेजर हथियार तकनीक है। यह प्रणाली पारंपरिक हथियारों की तुलना में बेहद किफायती है क्योंकि हर फायर की लागत अत्यधिक कम है।
इस बड़ी रणनीतिक पहल के तहत DRDO अब 2025 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नीति के तहत Mk-IIA की तकनीक को निजी क्षेत्र को सौंपने जा रहा है। इसका उद्देश्य सेना की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत लिया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार और निर्माण को बढ़ावा देता है।
DRDO इससे भी शक्तिशाली लेजर प्रणालियों पर काम कर रहा है, जिसमें 50 से 100 किलोवॉट की क्षमता वाले सिस्टम और भविष्य का “सूर्य” नामक 300 किलोवॉट लेजर हथियार शामिल है। इनका लक्ष्य भारत की हवाई रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करना है।
स्वदेशी 30 किलोवॉट लेजर हथियार का सीरियल उत्पादन शुरू होना भारतीय रक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा कदम है। इससे एयरबेस, रडार स्टेशन और रणनीतिक ठिकानों की ड्रोन हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया के अग्रणी डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन डिवेलपर्स में शामिल होता जा रहा है।
यह भी पढ़ें:
अमेरिका से डिलीवर हुए भारतीय सेना के पहले ‘अपाचे’ अटैक हेलिकॉप्टर !
11 सेकंड पहले रोका स्पेसएक्स का फाल्कन 9 मिशन का लॉन्च!
ढाका विमान हादसा: भारत ने बांग्लादेश को घायलों के इलाज में मदद की पेशकश!
निर्मल, सरल, संगठनशील और कर्मठ व्यक्तित्व के धनी श्रीरामचंद्र रामूका जी!



