निमोनिया पैदा करने वाले कीटाणुओं में छिपा है एक अहम वायरस, अध्ययन में खुलासा

बैक्टीरियोफेज – यानी ऐसे वायरस जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं – केवल परजीवी नहीं हैं, बल्कि वे अपने मेज़बान बैक्टीरिया को एक तरह का विषाक्त हथियार है।

निमोनिया पैदा करने वाले कीटाणुओं में छिपा है एक अहम वायरस, अध्ययन में खुलासा

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विज्ञान की दुनिया में लंबे समय से एक रहस्यमयी और विचित्र वायरस के रूप में देखा जाने वाला “टेलोमेर फेज” अब बैक्टीरिया की लड़ाई में एक निर्णायक हथियार बन सकता है। यह दावा मोनाश बायोमेडिसिन डिस्कवरी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की एक टीम ने किया है, जिनका कहना है कि यह वायरस “अच्छे बैक्टीरिया” की मदद से “खतरनाक बैक्टीरिया” को खत्म करने में सक्षम है।

इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि बैक्टीरियोफेज – यानी ऐसे वायरस जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं – केवल परजीवी नहीं हैं, बल्कि वे अपने मेज़बान बैक्टीरिया को एक तरह का विषाक्त हथियार, जिसे ‘टेलोसिन’ कहा जा रहा है, प्रदान करते हैं। इस विष के ज़रिए अच्छे बैक्टीरिया अपने प्रतिस्पर्धी और हानिकारक बैक्टीरिया को मार सकते हैं।

शोध के प्रमुख वैज्ञानिक ट्रेवर लिथगो ने कहा, “20 साल के बैक्टीरियल जीनोमिक्स में यह टेलोमेर फेज हमारी नजरों से छिपे रह गए थे। अब जाकर समझ में आ रहा है कि हमने जीवविज्ञान के एक अहम पहलू को ही अनदेखा कर दिया।”

यह खोज तब सामने आई जब क्लिनिकल क्लेबसिएला स्ट्रेन का अनुक्रमण करते समय चौथे प्रकार के टेलोमेर फेज की पहचान हुई। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि ये फेज दुर्लभ नहीं हैं, बल्कि जल स्रोतों समेत कई स्थानों से प्राप्त क्लेबसिएला बैक्टीरिया में आमतौर पर पाए जाते हैं।

लिथगो ने बताया कि टेलोमेर फेज से उत्पन्न टेलोसिन विष ने ‘गुड’ बैक्टीरिया को ‘बैड’ क्लेबसिएला से लड़ने में सक्षम बनाया है, जो आम तौर पर एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी होते हैं। इस शोध का अगला चरण अब यह समझना है कि यह विष शरीर में कैसे फैलता है, और मेज़बान जीवाणु इसे किस प्रक्रिया से बाहर निकालते हैं। सैली बायर्स ने कहा, “अब हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह विष बैक्टीरिया के लक्ष्य तक कैसे पहुंचता है और उन्हें कैसे निष्क्रिय करता है।”

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज न सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन से निपटने की रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, बल्कि उन मामलों में भी राहत दिला सकती है जहां एंटीबायोटिक्स अब बेअसर हो चुकी हैं।

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