चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और स्टेल्थ फाइटर विमानों की बड़ी संख्या के बीच भारत अपनी वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए स्वदेशी मानवरहित युद्धक विमान (UCAV) घातक UCAV पर तेजी से काम कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह उन्नत स्टेल्थ ड्रोन भविष्य में भारतीय वायुसेना की रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है, खासकर तब जब चीन की वायुसेना के पास बड़ी संख्या में पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान मौजूद हैं।
रिपोर्टों के अनुसार पीपुल्स लिबरेशन वायु सेना के पास पहले ही 300 से अधिक चेंगडु J‑20 स्टेल्थ फाइटर तैनात हैं और वह छठी पीढ़ी के विमानों पर भी काम कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए कम लागत वाले लेकिन अत्याधुनिक मानवरहित लड़ाकू प्लेटफॉर्म विकसित करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2022 में हुआ था टेक्नोलॉजी पहला परीक्षण:
इस परियोजना की दिशा में एक बड़ा कदम 1 जुलाई 2022 को तब उठाया गया था जब DRDO ने कर्नाटक के वैमानिकी परीक्षण रेंज चित्रदुर्ग से एक स्वायत्त “फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर” यूएवी का पहला परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरा किया। यह विमान भविष्य के घातक यूसीएवी का प्रारंभिक संस्करण माना जाता है।
DRDO ने उस समय बयान में कहा था, “पूरी तरह से ऑटोनॉमस मोड में ऑपरेट करते हुए, एयरक्राफ्ट ने टेक-ऑफ, वे पॉइंट नेविगेशन और स्मूथ टचडाउन सहित एकदम सही उड़ान दिखाई।” संगठन ने इसे भविष्य के मानवरहित विमानों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों को साबित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया था।
स्टेल्थ डिजाइन और लंबी मारक क्षमता:
घातक UCAV का ‘फ्लाइंग विंग’ डिजाइन इसे रडार से बचने योग्य बनाता है, जिससे यह दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक बिना पकड़े प्रवेश कर सकता है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन लगभग 13 टन बताया जा रहा है, जो कई हल्के लड़ाकू विमानों से भी अधिक है। इसकी मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है और इसमें लगभग 1.5 टन हथियार ले जाने की क्षमता वाला आंतरिक वेपन बे होगा।
यह प्लेटफॉर्म सटीक निर्देशित हथियारों के साथ गहरे हमले, दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने और निगरानी मिशन को अंजाम दे सकेगा। इसमें ऑनबोर्ड मिशन कंप्यूटर, डेटा लिंक, फायर कंट्रोल रडार और ‘आईडेंटिफिकेशन ऑफ फ्रेंड ऑर फो’ जैसी उन्नत प्रणालियां होंगी।
भारतीय वायुसेना भविष्य में इस ड्रोन को मानव संचालित लड़ाकू विमानों के साथ लॉयल विंगमैन के रूप में उपयोग करने की योजना बना रही है। इसे HAL तेजस Mk2 और भविष्य के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान जैसे प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मानवरहित विमान दुश्मन के क्षेत्र में पहले प्रवेश कर खतरों की पहचान कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर स्वयं जोखिम उठाकर मानव पायलटों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
स्वदेशी रक्षा क्षमता को मिलेगा बढ़ावा:
इस परियोजना को भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत स्वदेशी तकनीक से विकसित किया जा रहा है और इसमें सरकारी तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार भारतीय वायुसेना भविष्य में 8 से 9 स्क्वाड्रन यानी करीब 150 से 160 घातक UCAV शामिल करने पर विचार कर सकती है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि कम लागत, स्टेल्थ क्षमता और लंबी उड़ान अवधि के कारण घातक UCAV आने वाले दशक में चीन के बढ़ते ड्रोन और स्टेल्थ फाइटर नेटवर्क के खिलाफ भारत की वायु शक्ति को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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