भारत जल्द ही अपनी उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल ‘शौर्य-NG’ का परीक्षण करने जा रहा है, जिसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)द्वारा विकसित की गई है और इसे देश की सामरिक क्षमता में बड़ा इजाफा माना जा रहा है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें मैक 5 (ध्वनि की गति से पांच गुना) से अधिक रफ्तार से उड़ान भरती हैं, जिससे इन्हें मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
शौर्य-NG’ को इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए अपग्रेड किया गया है, ताकि यह दुश्मन के अत्याधुनिक रक्षा कवच को पार कर सके। इस मिसाइल को मैक 7 से ज़्यादा स्पीड से चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो लगभग 2.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की दूरी तय करती है।
मिसाइल की सबसे खास विशेषता इसकी उन्नत मैन्युवरिंग क्षमता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकती है, जिससे इसे ट्रैक करना और रोकना और भी कठिन हो जाता है। आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम आमतौर पर मिसाइल की संभावित दिशा का अनुमान लगाकर उसे रोकते हैं, लेकिन ‘शौर्य-NG’ की अप्रत्याशित उड़ान इसे ज्यादा घातक बनाती है।
आगामी परीक्षण पर देश और दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी। यदि यह सफल रहता है, तो यह न केवल DRDO की तकनीकी क्षमता को साबित करेगा, बल्कि भारत को उन्नत मिसाइल प्रणालियों के विकास में अग्रणी देशों की श्रेणी में भी स्थापित करेगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘शौर्य-NG’ भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एक बहुउद्देश्यीय और शक्तिशाली हथियार साबित हो सकता है, जो पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों और अत्याधुनिक हाइपरसोनिक प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी को पाटेगा।
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